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कश्मीर में अब आपस में लड़ रहे हैं विदेशी-स्थानीय आतंकी

आतंकी

श्रीनगर। कश्मीर के पुलवामा जिले में लश्करे तैयबा के कमांडर अबु दुजाना के मारे जाने के पीछे एक वजह यह भी है कि विदेशी आतंकवादियों और स्थानीय गिरोहों के बीच टकराव पैदा हो गया है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है।





‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के मुताबिक इस साल अब तक 117 आतंकवादी मारे गए हैं, इनमें से 86 विदेशी मूल के थे। सिर्फ जुलाई के महीने में ही 26 आतंकवादी मारे गए हैं। इसके पिछले साल जम्मू-कश्मीर में 80 आतंकवादी मारे गए थे। सेना के सूत्रों के अनुसार विदेशी और स्थानीय आतंकी गिरोहों के बीच टकराव होने के कारण हमें गोपनीय सूचनाएं मिलती हैं, जिनके आधार पर हम कार्रवाई करते हैं।

 ‘मोस्ट वांटेड’ सूची के कई आंतकी ढेर

हाल में जो आतंकी मारे गए हैं उनमें सबजार अहमद भट हिज्बुल-मुजाहिदीन का कमांडर था। जुनैद लश्कर का कमांडर था। इनके अलावा बशीर वानी, सद्दाम पद्दर, मोहम्मद यासीन और अल्ताफ मारे गए हैं। ये सब सुरक्षा बलों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में थे।

पाकिस्तान के रुख में नरमी

सेना के सूत्रों ने संकेत दिया है कि अब पाकिस्तानी रुख में भी नरमी आई है। पिछले 20 जुलाई को हुई डीजीएमओ वार्ता के बाद से घुसपैठों की संख्या भी कम हुई है। वस्तुतः जिस तरीके से पाकिस्तान ने पिछले दो महीनों में डीजीएमओ वार्ताओं का प्रस्ताव किया है उससे भी लगता है कि पाकिस्तान संपर्क बढ़ाना चाहता है। आमतौर पर डीजीएमओ वार्ताएं छह महीने में एकबार होतीं हैं। पर पिछले दो महीने में पाकिस्तान की ओर से दो बार बातचीत की गई।

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