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विश्व पर्यावरण दिवस: भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वॉटर ऑपरेशन’ में पर्यावरण अनुकूल पहल

भारतीय नौसेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के लिए पर्यावरण संरक्षण और हरित पहल हमेशा से ही एक प्रमुख क्षेत्र रहा है। एक जिम्मेदार बहुआयामी बल के रूप में, भारतीय नौसेना ने ऊर्जा संरक्षण, समुद्री प्रदूषण में कमी और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग करके अपने पर्यावरणीय फुटप्रिंट में कमी लाने की शुरुआत की है। ‘भारतीय नौसेना पर्यावरण संरक्षण रोडमैप’ (INECR), भारतीय नौसेना के ब्लू वॉटर ऑपरेशन के लिए ग्रीन फुटप्रिंट वाले विजन की प्रगतिशील प्राप्ति का मार्गदर्शक दस्तावेज और प्रमुख प्रवर्तक रहा है।





विश्व पर्यावरण दिवस, पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए एक वैश्विक मंच बन गया है जैसे कि समुद्री प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और दीर्घकालिक खपत आदि। भारतीय नौसेना ने इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया जिसमें लॉकडाउन के उपायों का पालन किया गया। हमेशा की तरह नियमित आउटडोर गतिविधियों के बजाय, नौसेना स्टेशनों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर शैक्षिक जागरूकता कार्यक्रम, व्याख्यान और वेबिनार आयोजित किए गए।

इंजन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से, भारतीय नौसेना ने ईंधन मानकों  में सुधार करने के लिए आईओसीएल के साथ हाथ मिलाया है। नये मानक अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से बेहतर हैं और इसमें सल्फर की बहुत कम सामग्री शामिल है जो कि लंबे समय में उत्सर्जन के स्तर के साथ-साथ जहाजों पर रख-रखाव की आवश्यकताओं को कम करेगी। जैव विविधता के महत्व को स्वीकार करते हुए, जो संयोगवश विश्व पर्यावरण दिवस का थीम भी है, महासागर पारिस्थितिकी को संरक्षित करने की दिशा में नौसेना के भीतर पर्याप्त बल दिया जा रहा है। भारतीय नौसेना ने अपनी स्वेच्छा से प्रदूषण से बचाव के लिए, अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन के सभी छह अनुसूची (मारपोल) नियमों को लागू किया है। जहाज पर उत्पन्न होने वाले कचरों का उपचार करने के लिए, सभी नौसैनिक जहाजों पर मारपोल अनुरूप प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों जैसे ऑइल वॉटर सेपरेटर्स (ओडब्लूएस) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया गया है। इसके अलावा, बंदरगाह के पानी का रख-रखाव सुनिश्चित करने के लिए, नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एनएमआरएल), मुंबई के द्वारा त्वरित बायोरेडिएशन तकनीक भी विकसित की गई है।

कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने के प्रयासों में, ई-वाहनों के उपयोग में लगातार वृद्धि करने की दिशा में लगातार उपाय किए जा रहे हैं जैसे कि ई-साइकिल, ई-ट्रॉली और ई-स्कूटर। लंबी अवधि की रणनीति के रूप में, ई-वाहनों या साइकिल के इस्तेमाल के द्वारा कार्य-समय के दौरान जीवाश्म ईंधन आधारित वाहनों के इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम करने की योजना बनाई जा रही है। इसको बढ़ावा देने के लिए, इकाइयां नियमित रूप से ‘नो व्हीकल डेज’ का पालन कर रही है और कुछ नौसैनिक प्रतिष्ठानों में ‘व्हीकल फ्री बेस’ अवधारणा की भी शुरुआत की जा रही है।

नौसेना में कुशल ऊर्जा उपकरणों के प्रगतिशील समावेशन द्वारा बिजली की खपत में समग्र कमी लाना है। लगातार प्रयासों के कारण पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था से अधिक ऊर्जा कुशल, ठोस प्रकाश व्यवस्था का निकट-पूर्ण अवस्थांतर हुआ है।

उभरती हुई प्रवृत्तियों और भारत सरकार की नीतियों के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में नौसेना द्वारा भी प्रयास किए जा रहे हैं। नौसेना के तटीय प्रतिष्ठानों में, 24 मेगावाट की सौर फोटो वोल्टाइक परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। इसके अलावा, व्यक्तिगत इकाइयों द्वारा सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों को भी स्थापित किया गया है, जिन्होंने पारंपरिक उपकरणों को क्रमशः बदल दिया है।

नौसेना की सभी इकाइयों में भारत सरकार के ग्रीन मानदंडों के अनुसार संग्रह, पृथक्करण और बाद में हैंडलिंग के लिए अति महत्वाकांक्षी अपशिष्ट हैंडलिंग प्रक्रियाओं को अपनाया गया है। नौसेना स्टेशन, करवार में एक एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा केंद्र (आईएसडब्ल्यूएमएफ) स्थापित किया जा रहा है, जिसमें गीले कचरे के लिए एक केंद्रीकृत अपशिष्ट पृथक्करण संयंत्र, जैविक अपशिष्ट कनवर्टर (ओडब्ल्यूसी) और सूखे/ गैर-अलग घरेलू कचरे को नियंत्रित करने की सुविधा शामिल है। नौसेना की हरित पहलों को वनीकरण और वृक्षारोपण अभियानों के द्वारा भी बढ़ावा दिया गया है। पिछले एक वर्ष में, 16,500 से ज्याद पेड़ लगाए गए हैं जो अनुमानित रूप से 330 टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम करेंगे।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना ने अपने परिचालन और रणनीतिक भूमिकाओं में ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत करते हुए सतत भविष्य की ओर निरंतर रूप से ध्यान केंद्रित किया है।

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