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भारतीय पनडुब्बी बेड़े पर गौर करने वाली 10 बातें

लंबे अरसे बाद इस महीने प्रोजेक्ट-75 के तहत आधुनिक पनडुब्बी कलवरी भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रही है। उसके शामिल हो जाने के बाद हमारे बेड़े की मारक क्षमता में तेज वृद्धि का एक और चरण शुरू होगा। फ्रांसीसी सहयोग से बन रही स्कॉर्पीन क्लास की छह पनडुब्बियों में यह पहली है। भारतीय पनडुब्बी बेड़े के विस्तार और उसके सामने खड़ी चुनौतियों के संदर्भ में इन 10 बातों पर भी गौर करना चाहिए:-





तय समय से पीछे चल रहे हैं हम

भारतीय पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया समय से काफी पीछे चली गई है। स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियों का कार्यक्रम 2005 से चल रहा है। हमारी निर्णय प्रक्रिया में देरी का परिणाम है कि पहली पनडुब्बी का कमीशन अब हो पा रहा है।

पानी के भीतर 40 दिन तक रह सकती है कलवरी, 350 मी गहराई तक जा सकती है

कलवरी ‘मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत देश में बनी है। इस परियोजना पर 3.7 अरब डॉलर का खर्च आ रहा है। यह देश की अब तक की सबसे आधुनिक पनडुब्बी है। इसकी लंबाई है 67 मीटर, चौड़ाई है 6.2 मीटर। कलवरी पानी में 350 मीटर की गहराई तक जा सकती है। यह पानी के भीतर करीब 40 दिन तक रह सकती है। 20 नॉटिकल प्रति घंटा इसकी रफ्तार है।

कलवरी क्लास की पनडुब्बियों में एआईपी सुविधा नहीं

कलवरी क्लास की पनडुब्बियों में एआईपी सुविधा नहीं है। भारत का रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) एआईपी की स्वदेशी तकनीक विकसित कर रहा है। योजना के अनुसार स्कॉर्पीन वर्ग की आखिरी दो पनडुब्बियों में भारतीय एआईपी व्यवस्था होगी। ।

कलवरी दुश्मन के जहाज के नीचे होगी और उसे भनक तक नहीं लगेगी

कलवरी की खासियत है इसके सेफ्टी फीचर्स। यह इतनी शांत है कि दुश्मन के जहाज़ के नीचे से भी अगर निकल जाए तो उसे इसके होने की भनक नहीं लगेगी। दुश्मन के सोनार इसे 20 नॉटिकल यानी 35-40 किलोमीटर तक लोकेट नहीं कर सकते। इसके पहले हिस्से में मिसाइल और बाकी हथियार होंगे, बीच के हिस्से में अधिकारी और जवान रहेंगे, तीसरे हिस्से में इंजन और चौथे हिस्से में मोटर है। 2020 तक ऐसी ही 5 और पनडुब्बियां समंदर में कमीशन की जानी हैं।

हर नौ महीने में एक पनडुब्बी होगी तैयार

इसका निर्माण फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस के तकनीकी सहयोग से किया गया है। मझगाँव में इस श्रेणी की पहली छह पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। कलवरी उनमें पहली है।यह परियोजना काफी पिछड़ गई थी। गोदी ने कहा है कि वह हर नौ माह में एक पनडुब्बी तैयार कर देगी।

छह और पनडुब्बियों का निर्माण करेगा भारत

कलवरी के बाद भारत ने प्रोजेक्ट-75आई के तहत छह और पनडुब्बियों के निर्माण की घोषणा की है, जिसके लिए कुछ विदेशी निर्माताओं से सूचना माँगी गई है। जरूरत इस बात की है कि इनके बारे में फैसले जल्द से जल्द हों। इनके अलावा भारत छह आणविक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना भी बना रहा है।

वर्ष 2030 तक 34 पनडुब्बियां हासिल करने की योजना

सन 2030 तक भारत की योजना 24 डीजल चालित, छह अणु शक्ति चालित और चार नाभिकीय शस्त्र सज्जित पनडुब्बियों को हासिल करने की है। हाल में रक्षा मामलों की पत्रिका जेंसवीकली की खबर है कि भारत अपनी पनडुब्बियों की जरूरत को बदलने जा रहा है।

अभी भारत के बेड़े में 15 तो चीनी बेड़े में 60 पनडुब्बी

खबरें हैं कि चीनी युआन-क्लास की एक पनडुब्बी मई के महीने से हिंद महासागर में है। हाल में भारत-अमेरिका और जापान की नौसेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास ‘मालाबार एक्सरसाइज़’ पर नजर रखने के लिए भी चीनी पोत इस इलाके में देखे गए थे। चीन के बेड़े में इस वक्त 60 पनडुब्बियाँ हैं और भारत के पास 15 हैं। इन 15 में से ज्यादातर काफी पुरानी हैं।

चीनी पनडुब्बियों की आवाजाही बढ़ी

हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की आवाजाही बढ़ गई है। चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में अपने युद्धपोत और पनडुब्बियाँ भी तैनात करने की योजना बनाई है। पाकिस्तान के पास पोत निर्माण का आधार ढाँचा नहीं हैं, पर वह कराची शिपयार्ड में पोत निर्माण की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश में है।

पाकिस्तान को 8 पनडुब्बी दे रहा है चीन

हाल में चीन ने पाकिस्तानको आठ पनडुब्बियाँ देने की घोषणा की है। ये पनडुब्बियाँ एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सुविधा से लैस होंगी। यानी इनकी पानी के भीतर रहने की क्षमता काफी बेहतर होगी। ये पनडुब्बियाँ पाकिस्तान को सन 2028 तक मिलेंगी। इनमें से कुछ का निर्माण पाकिस्तान में ही करने की योजना है। पाकिस्तान के पास मौजूदा अगोस्ता-वर्ग की पनडुब्बियों में भी एआईपी सुविधा है।

 

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