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9 साल पहले कमांडो के आरपार हो गई थी गोली

कमांडो प्रवीण

मेरठ। वर्ष 2008 में मुबंई पर हुए आतंकी हमले में सीने पर गोलियां झेलने वाले बहादूर मरीन कमांडो प्रवीण तेवतिया का जज्बा आज भी ज्यों का त्यों है। अपने फेफड़ों की ताकत दिखाने के लिए प्रवीण तेवतिया लद्दाख में मैराथन दौड़ में भाग लेने के लिए बेताब हैं। मैराथन का आयोजन लद्दाख के दुर्गम इलाकों में एक सितंबर को किया गया है।





नौ वर्ष पहले मुंबई पर हुए आतंकी हमले में प्रवीण तेवतिया कमांडो ऑपरेशन करने वाली उस टीम का हिस्सा थे जिसने ताज होटल में आतंकियों को ललकारा था। आतंकी एक अंधेरे कमरे में छिपे हुए थे। आतंकियों को ढेर करने के जज्बे के साथ प्रवीण तेवतिया कमरे में जा घुसे। घात लगाए बैठे आतंकियों ने तड़ातड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। बरसती गोलयों के बीच एक गोली प्रवीण की छाती के आरपार हो गई। प्रवीण ने हार नहीं मानी और जवाबी हमला कर तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। उनके इस साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।

घायल प्रवीण तेवतिया का लंबा इलाज चला। गोली लगने से उनके फेफड़ों को बेहद नुकसान पहुंचा था। कई ऑपरेशन हुए, पर इस दौरान प्रवीण कभी भी हतोत्साहित नहीं हुए। डॉक्टरों ने उन्हें कहा कि वे ऐसा कोई काम नहीं करें जिसमें ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़े। उन्हें ऐसे क्षेत्रों में भी न जाने की सलाह दी गई जो ज्यादा ऊंचाई पर हैं या जहां ऑक्सीजन की कमी हो।

पर प्रवीण का जज्बा उन्हें लद्दाख जाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस प्रेरणा का श्रेय तेवतिया 64 वर्षीय उस बूढ़ी महिला को देते हैं जिसे उन्होंने वर्ष 2012 में मुंबई में दौड़ते देखा था। उस दिन तेवतिया ने संकल्प लिया कि वे भी दौड़ेंगे। पहले उन्होंने पैदल चलना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे वे दौड़ने लगे। दो वर्ष पहले उन्होंने हाफ मैराथन में हिस्सा लिया और अब वह लद्दाख में मैराथन में हिस्सा लेने का इरादा रखते हैं। 18,380 फीट की ऊंचाई पर खारदुंगला में वे 72 किलोमीटर लंबे रूट पर दौड़ेंगे। प्रवीण का हौंसला उन्हें नई ऊंचाइयों को छूने की शक्ति प्रदान कर रहा है। उम्मीद है कि अपने अभियान में वे कामयाब होंगे।

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