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समर नीति: नौसेना और मोदी का ‘सागर’

सिंगापुर के साथ नौसेना सहयोग
फाइल फोटो

भारत के आसपास और दूरदराज के सागरीय इलाके में सभी तटीय देशों को सुरक्षा और समुद्री व्यापार व विकास को सुरक्षित माहौल प्रदान करने में अपना योगदान करने के इरादे से तटीय देशों के साथ तालमेल व समन्वय करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन साल पहले सागर नाम का एक समुद्री सिद्धांत प्रतिपादित किया था । सागर अंग्रेजी के SAGAR अक्षरों से बना है जिसका पूरा विस्तार है- ‘सिक्यूरिटी एंड ग्रोथ फार ऑल इन द रीजन’।





इसी सागर सिद्धांत के अनुरूप साल 2020 के दौरान भारतीय नौसेना ने बड़ी ताकवर नौसेनाओं के अलावा छोटे तटीय देशों के साथ भी तालमेल, आपसी आदान प्रदान और मेलजोल की गतिविधियां की और न केवल इन देशों के साथ दोस्ताना रिश्तों को मजबूती प्रदान की बल्कि इन छोटे देशों को कोविड से निपटने और प्राकृतिक आपदाओं से निबटने में मदद मुहैया कर बड़े देश होने के नाते अपना कर्तव्य निभाया।

वास्तव में साल 2020 भारतीय नौसेना के लिये भारी चुनौती वाला रहा। एक तरफ कोविड-19 महामारी से जूझने और दूसरी ओर लद्दाख सीमाओं पर चीन द्वारा पैदा चुनौतियों का सामना करने के लिये हर वक्त समाघात तौर पर चौकस रहने की चुनौती रही लेकिन इन सबके बीच भारतीय नौसेना ने 13 बार बहुराष्ट्रीय और दिवपक्षीय साझा अभ्यास किये जिसमें सबसे नवीनतम साझा युद्धाभ्यास रूस की नौसेना के साथ चार और पांच दिसम्बर को था। इसके पहले भारतीय नौसेना ने नवम्बर के महीने में अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान को लेकर चार देशों का साझा बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास आयोजित किया। इससे चारों देशों के बीच आपसी विश्वास और भरोसा बढ़ा।

जहां एक ओर बड़े ताकतवर देशों के साथ भारतीय नौसेना ने साझा युद्धाभ्यास किये वहीं छोटे समुद्र तटीयऔर द्वीप देशों के साथ भी पड़ोसी पहले की नीति को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना ने मालदीव , सेशल्स और मारीशस के साथ मिलकर सभी देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों की मिल कर चौकसी का दायित्व निभाया। इन द्वीप देशों के अलावा भारतीय नौसेना ने थाइलैंड, बांग्लादेश और इंडोनेशिया के साथ साझा समुद्री गश्ती अभ्यास (कोरपैट) किये।

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह द्वारा नौसेना दिवस के मौके पर दी गई जानकारी के मुताबिक इसके अलावा मित्र तटीय देशों के साथ उनके आग्रह पर 130 दिनों तक जलीय सर्वेक्षण भी किये। इसका इरादा सामूहिक तौर पर समुद्री सहयोग ढांचा बनाना था। ये हिंद महासागर नेवल सिम्पोजियम ( आयंस- IONS) के तहत किये गए। इसके तहत क्षमता निर्माण और बढोतरी की गतिविधियां भारतीय नौसेना ने की। इन सामूहिक मेलजोल और सहयोग गतिविधियों से आपसी तालमेल बढ़ा और सुरक्षा का माहौल बना। इन सब गतिविधियों से हिंद महासागर में एक पसंदीदा समुद्री साझेदार के तौर पर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।

इसके साथ ही कोविड की वजह से जिन मित्र देशों की नौसेनाओं को ट्रेनिंग देने का काम रुका हुआ था उसे कोविड के बीच ही फिर शुरु किया गया। कुछ खास क्षेत्रों में मित्र देशों को आनलाइन ट्रेनिंग देने की प्रक्रिया भी शुरु की गई। मित्र देशों की समुद्री ताकत बढ़ाने में मदद देने के अलावा भारतीय नौसेना ने छोटे तटीय और द्वीप देशों को प्राकृतिक आपदा के वक्त मानवीय सहायता भी मुहैया कराई और उन देशों का दिल जीता। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस- ऐरावत ने 20 जनवरी को समुद्री तूफान से जानमाल को भारी क्षति के बाद राहत पहुंचाने का काम किया। ऐरावत और त्रिखंड पोतों के जरिये केन्या और सोमालिया को राहत सामग्री पहुंचाई गई।

इस तरह भारत के निकट के समुद्री इलाके में जब भी जैसी जरुरत पैदा हुई चाहे वह रक्षा क्षमता मजबूत करने की बात हो या प्राकृतिक आपदा से राहत पहुंचाने की बात हो भारतीय नौसेना ने सबसे पहले मदद पहुंचाने वाली नौसेना यानी फर्स्ट रेसपोंडर के तौर पर अपनी छवि बनाई औऱ भारत के निकट के समुद्र तटीय देशों और द्वीप देशों को मदद पहुंचाने का काम किया। इस तरह भारतीय नौसेना ने प्रधानमंत्री की सागर अवधारणा को साकार किया।

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