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स्पेशल रिपोर्ट: पनडुब्बियों को नई ताकत देने वाली स्वदेशी प्रणाली बनी

स्वदेशी डीजल पनडुब्बी

नई दिल्ली। भारतीय डीजल पनडुब्बियों को परमाणु पनडुब्बियों जैसी क्षमता देने वाली प्रणाली का भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने सफल जमीनी परीक्षण किया है। एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्सन (एआईपी) तकनीक की बदौलत किसी डीजल पनडुब्बी को काफी अधिक दिनों तक गहरे समुद्र में छिप कर रहने की क्षमता हासिल हो जाएगी।





रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO) के एक अधिकारी के मुताबिक किसी डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन में एआईपी तकनीक वाली प्रणाली लगा देने से इसकी ताकत में कई गुना इजाफा होगा। भारतीय पनडुब्बियों के लिये फ्युल सेल आधारित एआईपी तकनीक के सफल जमीनी परीक्षण से डी आर डी ओ ने अब तक कई लक्ष्य हासिल कर लिये हैं।

इस तकनीक के सफल परीक्षण को नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने रक्षा शोध एवं विकास सचिव औऱ डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी की मौजूदगी में देखा। यह परीक्षण महाराष्ट्र के अम्बरनाथ में स्थित नेवल मटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी में किया गया।

इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि के लिये डीआऱडीओ के वैज्ञानिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश खासकर भारतीय नौसेना के लिये काफी अहमियत रखता है। डीआरडीओ के चेयरमैन ने कहा कि नौसेना के मानकों के अनुरुप इस प्रणाली को जल्द से जल्द भारतीय पनडुब्बियों में तैनात करने की हर सम्भव कोशिश की जाएगी।

नौसैनिक सूत्रों के मुताबिक फ्रांस के सहयोग से जो स्कारपीन डीजल पनडुब्बियां बनाई जा रही हे उनमें इस स्वदेशी एआईपी तकनीक वाली प्रणाली को तैनात किया जाएगा। गौरतलब है कि मौजूदा डीजल पनडुब्बियों को 24 घंटे में एक बार सतह पर ऑक्सीजन के लिये आना होता है। इससे दुश्मन को पता चल जाता है कि कोई पनडुब्बी किसी खास इलाके में विचरण कर रही है। लेकिन एआईपी प्रणाली वाली पनडुब्बी समुद्र के भीतर एक सप्ताह से दस दिनों तक पानी के भीतर छिपी रह सकती है इससे डीजल पनडुब्बियों के पानी में रहने की क्षमता बढ़ जाएगी। परमाणु बिजली से चालित पनडुब्बियां दो महीने से अधिक वक्त तक समुद्र की गहराई में रह सकती हैं।

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