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अंतिम यात्रा पर निकला नौसेना का ‘INS विराट’, देश के लिए कई बार निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

INS-Virat
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना में सबसे लंबे वक्त तक सेवा में रहने वाला आईएनएस विराट अपने आखिरी सफर पर मुंबई से गुजरात के अलंग स्थित जहाज तोड़ने वाले यार्ड के लिए शनिवार को रवाना हो गया। नौसेना में विराट को ‘ग्रांड ओल्ड लेडी’ भी कहा जाता है। अलंग स्थित श्रीराम ग्रुप ने इस ऐतिहासिक लड़ाकू विमानवाहक पोत को 38.54 करोड़ रुपये की बोली लगाकर अपने नाम किया। यह इकलौता लड़ाकू विमान वाहक पोत है जिसने भारत और ब्रिटेन की नौसेना में अपनी सेवाएं प्रदान की है।





मीडिया खबरों के मुताबिक नौसेना का यह युद्धपोत रविवार देर रात भावनगर पहुंचेगा। अपनी सेवा के दौरान इसने 10 लाख समुद्री किलोमीटर (7 लाख मील) से ज्यादा की दूरी को तय किया, जो पृथ्वी के 27 चक्कर लगाने के बराबर है।

वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद आईएनएस विराट मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में लंगर डाले खड़ा था पर अब इसे अंतिम यात्रा पर अलंग के लिए रवाना कर दिया गया है। विराट को खरीदने वाले श्रीराम ग्रुप के चेयरमैन मुकेश पटेल ने बताया कि युद्धपोत में उच्च गुणवत्ता का स्टील इस्तेमाल किया गया है। यह बुलेटप्रूफ मटेरियल भी है और इसमें लोहा का नामोनिशान भी नहीं है।

आईएनएस विराट के लोहे का इस्तेमाल मोटरसाइकिल बनाने के लिए किया जा सकता है। नीलामी में इस युद्धपोत को खरीदने वाली कंपनी ने इसकी जानकारी दी है। श्रीराम ग्रुप ने कहा है कि इसे पूरी तरह तोड़कर छोटे- छोटे  टुकड़ों मे बदलने में एक साल का समय लगेगा। श्रीराम ग्रुप के पास एशिया का सबसे बड़ा स्क्रैपयार्ड है, जो गुजरात के अलंग में मौजूद है।

गौरतलब है कि आईएनएस विराट को रॉयल नेवी में वर्ष 1959 में शामिल किया गया था। यह मुलत: ब्रिटिश विमान वाहक पोत है। भारत में इसे साल 1986 में खरीदा गया था। नौसेना में 30 साल सेवा देने के बाद मार्च, 2017 में इसे सेवानिवृत्त कर दिया गया था। भारत से पहले ब्रिटेन की रॉयल नेवी में एचएमएस हिर्मस के रूप में 25 साल अपनी सेवाएं प्रदान कर चुका था। फॉकलैंड युद्ध में ब्रिटिश नेवीके ओर से इस युद्धपोत ने अहम भूमिका निभाई थी।

आईएनएस विराट ने जुलाई 1989 में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए ऑपरेशन ज्यूपिटर में हिस्सा लिया था। साल 2001 में संसद हमले के बाद ऑपरेशन पराक्रम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बता दें कि इस जहाज का वजन 28,700 टन है। इस पर 150 अधिकारी और 1,500 नाविकों की तैनाती की जा सकती थी।

 

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