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भारतीय नौसेना और बंगलादेश नौसेना का द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ शुरू

भारत-बांग्लादेश नौसेना का अभ्यास

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना (आईएन) और बांग्लादेश नौसेना (बीएन) के द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ का दूसरा संस्करण 03 अक्टूबर को बंगाल की उत्तरी खाड़ी में शुरू हो गया। बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का पहला संस्करण 2019 में आयोजित किया गया था, इसका उद्देश्य समुद्री अभ्यास और संचालन के एक व्यापक स्पेक्ट्रम के माध्यम से जंगी कार्रवाई का अंतर और संयुक्त परिचालन कौशल विकसित करना है। बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास के इस सत्र में दोनों नौसेनाओं के पोत इस दौरान सतह युद्ध अभ्यास, नाविक कला विकास और हेलीकॉप्टर संचालन का अभ्यास करेंगे।





इसके अतिरिक्त 4 से 5 अक्टूबर तक बंगाल की उत्तरी खाड़ी में भारतीय नौसेना और बांग्लादेश नौसेना संयुक्त गश्ती (कॉर्पेट) के  तीसरे सत्र में भी हिस्सा लेगी, जिसमें दोनों नौसेना इकाइयां अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के साथ संयुक्त रूप से गश्त करेंगी। संयुक्त गश्ती करने से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ को बेहतर हुई है और गैरकानूनी गतिविधियों के संचालन को रोकने के उपायों को लागू करने में तत्परता दिखाई गई है।

भारतीय नौसेना की तरफ़ से स्वदेशी तौर पर निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर कार्वेट पोत (आईएनएस) किल्टान और स्वदेश में ही निर्मित गाइडेड-मिसाइल कार्वेट आईएनएस खुखरी इसमें भाग ले रहे हैं। वहीं बांग्लादेश नौसेना का पोत (बीएनएस) अबू बक्र गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट और बीएनएस प्रेटॉय गाइडेड-मिसाइल कार्वेट अभ्यास में शामिल हो रहे हैं। इन पोतों के अलावा दोनों नौसेनाओं के मेरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट और इंटीग्रल हेलीकॉप्टर (एस) भी अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

भारत और बांग्लादेश के बीच गतिविधियों और अंतःक्रियाओं की एक विस्तृत श्रृंखला रही है, जिससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध हैं और ये साल दर साल और मज़बूत होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त भारत और बांग्लादेश की जनता घनिष्ठ सांस्कृतिक बंधन तथा लोकतांत्रिक समाज की साझा दृष्टि और नियमों पर आधारित आदेश भी साझा करती है।

इस वर्ष बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का यह संस्करण बहुत अधिक महत्व रखता है क्यूंकि यह बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की 100वीं जयंती मुजीब बारशो के मौके आयोजित हो रहा है।

बोंगोसागर तथा भारतीय नौसेना और बांग्लादेश नौसेना संयुक्त गश्ती (कॉर्पेट) को 03 दिनों में शुरू किया जाएगा और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सागर (सुरक्षा और क्षेत्र में सभी के लिए विकास) के दृष्टिकोण के एक हिस्से के रूप में भारतीय नौसेना बांग्लादेशी नौसेना को प्राथमिकता देती है।

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