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NSG कमांडोज को अलग किस्म के ‘दुश्मन’ से अलर्ट रहने की मिली हिदायत

NSG-कमांडोज

नई दिल्ली। नेशनल सुरक्षा गार्ड यानी ब्लैक कैट कमांडो एक ऐसे छुपे हुए ‘दुश्मन’ से परेशान है जिसकी वजह से उन्हें अपने वजूद को बचाने के लिए लड़ना पड़ रहा है। उनका यह छुपा दुश्मन हर वक्त उनके साथ ही रहता है और कड़ी मशक्कत के बाद मिली एनएसजी की नौकरी भी जाने का खतरा पैदा कर रहा है। जी हां, उनका ये दुश्मन उनका अपना ‘मोटापा’ है। एनएसजी के कुछ कमांडो इस समय अपने बढ़े वजन से काफी परेशान हैं। परेशानी का कारण बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल है।





NSG ने इस पर सभी रैंकों के लिए एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि उन्हें अधिक वजन वाले कमांडोज की जरूरत नहीं। एनएसजी केवल स्लीम और फिट कमांडो के लिए है। ऐसे में कमांडोज अपना वेट कम करें या वे एनएसजी छोड़ दें। आला अधिकारी ज्यादा वजन वाले कमांडोज की संख्या दस फीसदी से भी कम बताते हैं। एनएसजी के महानिदेशक ने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- एनएसजी सिर्फ फिट लोगों के लिए है। कमांडोज अपना वजन घटाएं या वे बाहर का रास्ता देखें।

जानकारों के मुताबिक जो लोग फिटनेस में खड़े नहीं पाए गए हैं, उन्हें बैठने वाला कार्य सौंपा गया है, जैसे- कुक और ड्राइवर आदि का काम। उन्होंने कहा कि मानेसर में एक अस्पताल है जहां सेना के कई अधिकारी बीएमआई घटाने को लेकर वहां जाते हैं। एक पूर्व कमांडो के अनुसार जंगी यूनिट्स हमेशा फिट रहती हैं। सेना में कुछ वक्त पहले कमांडोज के लिए एक्सरसाइज आरंभ कराया गया था ताकि वे फिजीकली और मेनटली तौर पर फिट हो सकें।

दूसरी तरफ, एक सीनियर फिजीशियन का कहना है कि BMI का सिद्धांत काफी पुराना है और इसी तकनीक पर आर्मी अपने अहम फैसले करती है। आर्मी को जवानों की फिटनेस घोषित करते समय शरीर की बनावट पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

 

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