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आतंक के खात्मे का दूसरा नाम ‘NSG कमांडो’

एनएसजी कमांडो

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) देश की उन नौ स्पेशल फोर्सेज में से है जो अपनी विशेषताओं के लिए बखूबी जानी जाती है। एनएसजी का नाम आज देश के हर आदमी की जुबां पर है। एनएसजी कमांडो को एक मशीन की तरह अचूक निशाना लगाने जैसे कई कड़े अभ्यासों से होकर गुजरना पड़ता है। एनएसजी का मुख्य कार्य आतंकी गतिविधियों से देश के आंतरिक सुरक्षा को चाक-चौबंद रखना होता है। यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।





राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की स्थापना वर्ष 1984 में की गई। उस वक्त पंजाब में अलग राज्य की मांग ने आंदोलन का रूप ले लिया था। पंजाब में सुरक्षा-व्यवस्था का माहौल खराब था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आतंकी हमलों को रोकने के मद्देनजर स्पेशल फोर्स की आवश्यकता थी जिसे देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की स्थापना की गई। बीते वर्षों में एनएसजी ने ऐसे कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं जो इस फोर्स की साख, विश्वास, निष्ठा को बढ़ाता है।

NSG कमांडो को क्यों कहा जाता है ब्लैक कैट ?

एनएसजी

एनएसजी

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के यूनिफॉर्म का रंग काला होता है, जिसकी वजह से इन्हें ब्लैक कैट कमांडो के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे होती है एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग

एनएसजी-ट्रेनिंग

कमांडो की ट्रेनिंग के लिए इन्हें एनएसजी के 26 पैमानों पर खरा उतरना होता है। कमांडो की शुरुआती ट्रेनिंग 90 दिनों की होती है। इस ट्रेनिंग को खत्म करने के बाद उन्हें नौ महीने की और कड़ी ट्रेनिंग से होकर गुजरना पड़ता है। ऊंचाई से छलांग लगाने से लेकर अचूक निशाना लगाने जैसे कई अभ्यासों से होकर गुजरना पड़ता है।

50-70 फीसद कमांडो हो जाते हैं बाहर

एनएसजी

एनएसजी (फाइल-फोटो)

नौ महीने की ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद इन्हें अगले राउंड की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग इतनी टफ होती है कि इसमें लगभग 50 से 70 प्रतिशत कमांडो बाहर निकल जाते है।

जो इनके मापदंडों पर खरा नहीं उतरता उसे NSG में शामिल नहीं किया जाता

संयुक्त अभ्यास

अभ्यास : आतंकियों के चंगुल से बंधकों को मुक्त कराने के लिए एनएसजी के कमांडो ऐसे उतारे जाते हैं

NSG कमांडो को हर तरह की ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें मार्शल आर्ट भी शामिल होती है। इन कमांडो को सिखाया जाता है कि जब दुश्मन अचानक आप पर हमला कर दें तो उन पर कैसे हावी हों। सिर्फ बन्दूक ही नहीं एक NSG कमांडो ‘हैण्ड टू हैण्ड कॉमबैट’ यानी आमने-सामने की लड़ाई में भी पूरी तरह निपुण होता है। ‘मार्शल आर्ट ट्रेनिंग’ से कमांडो को इस तरह तैयार किया जाता है ताकि ज़रूरत पड़ने पर वो बिजली की रफ़्तार की तरह पल भर में दुश्मन को मौत के घाट उतार दे।

ट्रेनिंग के दौरान ‘हेड शॉट’

NSG-कमांडो

काफी मुश्किल भरा होता है इन कमांडो की ट्रेनिंग (फाइल फोटो)

NSG कमांडो को एक मशीन की तरह अचूक निशाना लगाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान सिर्फ ‘हेड शॉट’ यानी सिर को ही निशाना बनाया जाता है। सिर पर निशाना लगाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि पहले दुश्मन के सिर से होती हुई गोली दूसरे दुश्मन को भी अपनी जद में ले सके।

एनएसजी कमांडो की संरचना

जीएसजी- 9

जर्मनी की स्पेशल फोर्सेज जीएसजी- 9 (फाइल)

जर्मनी की GSG- 9 को विश्व में आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स कहा जाता है। ये वहां की स्पेशल फोर्स है। भारत में उसी की तर्ज पर एनएसजी को तैयार किया गया है।

एनएसजी कमांडो को दो समूहों में बांटा जाता है एक एक्शन ग्रुप और दूसरा स्पेशल रेंजर्स ग्रुप। स्पेशल एक्शन ग्रुप में 54 फीसदी सेना के जवान शामिल किए जाते हैं और बाकी एनएसजी कमांडो को केंद्रीय पुलिस संगठन, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी और रैपिड एक्शन फोर्स के साथ साझा कार्रवाई के लिए रखा जाता है।

कहां है एनएसजी का मुख्यालय ?

एनएसजी

एनएसजी मुख्यालय (प्रतीकात्मक)

हरियाणा के मानेसर में एनएसजी का मुख्यालय स्थित है। 26/11 मुंबई हमलों के बाद एनएसजी कमांडो का दूसरे शहरों में भी सेंटर खोलने की जरूरत महसूस की गई, फिलहाल दिल्ली के अलावा कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और चेन्नई में एनएसजी के सेंटर बनाए गए।

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