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NSG में सिर्फ एक महिला ब्लैक कैट कमांडो, जानें क्यों?

एनएसजी कमांडो

नई दिल्ली। आपको यह जानकर हैरत होगी कि देश के अंदर आतंकी वारदातों को लेकर बनी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) में महज एक ही महिला कमांडो है और वो भी अब मैटर्निटी लीव पर जा चुकी हैं। इसके बाद अब इसमें सिर्फ मेल कमांडो ही बचे हैं। महिला कमांडो मैटर्निटी लीव खत्म होने पर एनएसजी दोबारा ज्वाइन कर लेंगी पर लगता है कि तब तक केवल पुरुष कमांडो के दम पर ही एनएसजी काम करेगा।





एक न्यूज मैगजीन के मुताबिक महिलाओं के ब्लैक कैट कमांडोज के एक दल को स्पेशल ऑपरेशन के लिए और वीआईपी सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग दी गई थी पर दुर्भाग्य से पांच साल बाद एनएसजी से अब महिला कमांडो लगभग लुप्त हो चुकी हैं। एनएसजी महिला कमांडो के सामने सबसे ज्यादा दिक्कत उस वक्त सामने आई थी जब यूपी और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्रियों मायावती और जयललिता को एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज के द्वारा ‘जेड प्लस’ सुरक्षा दी गई थी। उस समय दोनों ही नेताओं ने अपने ही जेंडर के कमांडोज की तैनाती के लिए साफ मना कर दिया था।

NSG महिला कमांडो तो पुरुष कमांडोज की तरह ही 90 दिनों की फुल ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। महिला कमांडोज को भी पुरुष कमांडोज की तरह शारीरिक और मानसिक स्तर पर कड़े ट्रेनिंग से होकर VIP और VVIP की सिक्यूरिटी में तैनात किया जाता है। एनएसजी के पूर्व डीजी आरसी तायल का कहना है कि एनएसजी की महिला कमांडोज के चले जाने के बाद उनकी भर्ती के फैसले को धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि जब राज्य पुलिस अच्छी महिला कमांडोज तैयार तैयार करने में नाकाम हो जाते हैं तब एनएसजी की महिला कमांडोज की स्किल्स बहुत फायदेमंद हो जाती है। उन्हें कभी जेंडर के आधार पर किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाती।

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