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सेना की चीन सीमा पर तीव्र गति से आवाजाही के लिए ‘असाल्ट ट्रैक्स’ बिछाने की तैयारी

सड़क निर्माण

नई दिल्ली। चीन सीमा पर भारतीय जवानों की टुकड़ी कम वक्त में तीव्र  गति से आवाजाही आसानी से कर सके, इसके लिए सेना ने तैयारी आरंभ कर दी है। डोकलाम तनातनी के बाद भारतीय सेना ने सड़क निर्माण ठीक तरह से करने फैसला किया है। इसके अलावा सैनिकों की तीव्र आवाजाही के मद्देनजर असाल्ट टैक्स की खरीद की जा रही है ताकि सैनिकों की आवाजाही तीव्र गति से सुनिश्चित हो सके। 237 साल पुरानी कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स (CoE) अहम इंजीनियरिंग मदद उपलब्ध कराती है। यह सैनिकों तथा तोपों को तेज आवाजाही के लिए अहम सीमाई इलाकों में सुचारू संपर्क मुहैया कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।





इसके अन्तर्गत सेना ने पहाड़ काटने और सड़क बिछाने की अलग-अलग मशीनों के नए उपकरणों के लिए ऑर्डर दिए हैं। सेना ने बारूदी सुरंग का पता लगाने के लिए जवानों को दोहरे ट्रैक माइन डिटेक्टर से लैस करने का भी फैसला लिया है। सेना अपने मुख्य इंजीनियरों को पूरे लगन के साथ इस कार्य को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी हैं।

जानकारों के मुताबिक सेना अपने कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स ने इस उद्देश्य के लिए कई पहले ही कई महत्वपूर्ण कदम उठाने आरंभ कर दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सेना हेडक्वॉर्टर ने बारूदी सुरंग का पता लगाने की कोर इंजीनियर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए एक हजार से ज्यादा दोहरे ट्रैक माइन डिटेक्टर्स आर्डर दिए गए हैं।

जानकारों के मुताबिक संवेदनशील बॉर्डर पर आधारभूत ढांचे को बढ़ाना सरकार की सशस्त्र सेनाओं की लड़ाकू तैयारियों को प्रोत्साहित करने की रणनीति का एक पार्ट है। गौरतलब है कि भारत-चीन तकरीबन 4 हजार किमी लंबी सीमा साझा करते हैं।

चीनी आर्मी द्वारा तनाव वाले क्षेत्र में सड़क निर्माण रोकने को भारतीय सैनिकों के रोकने के बाद 16 जून से डोकलाम में 73 दिनों तक दोनों देशों के सैनिकों के बीच गतिरोध कायम था जो 28 अगस्त को आपसी सहमति के बाद खत्म हुआ।

 

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