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उप सेना प्रमुख ने COVID-19 के बाद की सुरक्षा चुनौतियों पर बांग्लादेश नेशनल डिफेंस कॉलेज को किया संबोधित

उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सैनी
फाइल फोटो

नई दिल्ली। उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सैनी ने 2 दिसंबर को ‘COVID- 19 महामारी के बाद की सुरक्षा चुनौतियां’ विषय पर नेशनल डिफेंस कोर्स के प्रतिभागियों को वर्चुअल मंच के माध्यम से संबोधित किया। इससे पहले 2011 में अपने करियर के दौरान उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज, बांग्लादेश में हिस्सा लिया था। उप सेना प्रमुख का संबोधन उभरते हुए विश्व में कोरोना वायरस के प्रभाव विशेषकर इसके सैन्य और सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित था। इसके अलावा उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के तरीके को लेकर अपने विचार रखें।





कोरोना वायरस के प्रभाव पर उप सेना प्रमुख ने कहा कि सैन्य क्षमता में धन की कमी की वजह से अधिकांश देशों की सामरिक सुरक्षा प्रभावित हुई है और परियोजनाओं के लिए निश्चित धन को आकस्मिक स्वास्थ्य जरूरतों के लिए आवंटित कर दिया गया। वि-वैश्वीकरण के चलन पर टिप्पणी करते हुए उप सेना प्रमुख ने इस बात को रेखांकित किया कि अति-राष्ट्रवाद से प्रेरित बहुत सारे देश वि-वैश्वीकरण की त्वरित प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। यहां तक की ये देश वस्तुओं, लोगों, सेवाओं और विचारों के संचालन के लिए सीमाओं को बंद करने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘जब कई देश वायरस पर नियंत्रण पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस वक्त कुछ देशों ने सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रूप से अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल किया, जो वैश्विक समुदाय के लिए अच्छा नहीं है।’

भविष्य के युद्धों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, ‘भविष्य के युद्ध शून्य लागत युद्धों की ओर जा सकते हैं, जहां एक बहुत जहरीला रोगजनक उच्च-प्रौद्योगिकी शास्त्रागार की जगह ले सकता है।’ इसके अलावा उप सेना प्रमुख ने इसका भी उल्लेख किया है कि कमजोर सेनाएं एक अप्रतिबंधित युद्ध क्षेत्र में एक असीमित लाभ की तलाश में रहेंगे, वहीं मतों की लड़ाई के लिए सोशल  मीडिया पसंदीदा मार्ग बना रहेगा।

उप सेना प्रमुख ने बल तत्परता, प्रशिक्षण, परिचालन सैन्य तंत्र और मानव संसाधन से संबंधित मुद्दों पर कोविड-19 के प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बल प्रबंधन एक चुनौती है, जिसमें आपूर्ति कार्यक्रम में देरी की वजह से उत्पादन बंद हो जाते हैं और कार्यबल में गड़बड़ियां होती हैं।

इस पाठ्यक्रम में हिस्सा लेने वाले भविष्य के वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व को कोविड युग के बाद की सिफारिशों के तहत उप सेना प्रमुख ने जोर देकर कहा, ‘इस क्षेत्र के सेनाओं को एक रक्षा सहयोग योजना तैयार करनी चाहिए, जिससे वे इस तरह के स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान पहले प्रतिक्रिया देने वाले बन सकें।’ इसके अलावा उन्होंने इस तरह के खतरों की एकीकृत पहचान, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी सक्षम समाधानों का भी आह्वाहन किया। उप सेना प्रमुख ने ‘रक्षा औद्योगिक आधार को फिर से मजबूत करने के लिए निरंतरता और आधुनिकीकरण की जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता’ पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने ‘स्वास्थ्य सुरक्षा को एक नया प्रोत्साहन देकर संरक्षण और तत्परता पर बल’ पर भी ध्यान देने के लिए कहा। उप सेना प्रमुख ने टिप्पणी की कि प्रशिक्षण में प्रौद्योगिकी का उपयोग, डिजिटल संचार का विकास और सेनाओं के बीच सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों का साझाकरण के माध्यम से कोविड-19 से संबंधित चुनौतियों से निपटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सैनी का यह संबोधन बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सैन्य आत्मीयता को देखते हुए भारतीय सेना के लिए एक प्राथमिकता बनी हुई है।

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