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भारत ने जैवलिन की जगह इजरायली स्पाइक क्यों लिया?

नई दिल्ली। साल 2011 में जब भारत एंटी टैंक मिसाइल का फैसला कर रहा था, तब उसके सामने दो विकल्प थे। एक था अमेरिका में बनी एफजीएम-148 जैवलिन मिसाइल का, जिसे दो सरकारों के बीच समझौते के तहत खरीदा जाता। दूसरा था इजरायली फायर एंड फॉर्गेट गाइडेड मिसाइल स्पाइक- MR का। इजरायली मिसाइल का विकास वहाँ की कंपनी रफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने किया है।





भारत ने स्पाइक का चुनाव किया, क्योंकि इजरायल इसके तकनीकी हस्तांतरण और भारत में इसके निर्माण के लिए भी तैयार था। भारत ने अमेरिका से इसे सीधे खरीदने के बजाय भारत में इसके उत्पादन को वरियता दी। भारत में अब इसका उत्पादन कल्याणी-राफेल एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा हैदराबाद में किया जा रहा है। यह संयुक्त क्षेत्र की कंपनी है जो भारत में मिसाइलें बनाने वाली निजी क्षेत्र की पहली कंपनी बन गई है।

स्पाइक मिसाइल एक ट्रायपॉड (तिपाई) पर आधारित मिसाइल है, जिसके साथ उसकी फायर कंट्रोल यूनिट जुड़ी है। इसका इस्तेमाल इनफेंट्री कर सकती है या इसे तेज गति से चलने वाले वाहन, बख्तरबंद गाड़ी या आर्म्ड परसोनेल कैरियर पर भी लगाया जा सकता है। इसके निम्नलिखित संस्करण हैं:-

  1. स्पाइक-एसआर: शॉर्ट रेंज यानी 1-1.5 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली।
  2. स्पाइक-एमआर: मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल जिसकी रेंज 2.5 किलोमीटर है।
  3. स्पाइक-एलआर: लंबी दूरी तक मार करने वाली, जिसकी मार 5 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल टू-वे फाइबर-ऑप्टिक डेटा लिंक का इस्तेमाल करता है, जो मिसाइल के सीकर से ऑपरेटर के पास चित्र भेजता है, ताकि पता लग सके कि टार्गेट के बारे में जानकारी मिल सके।
  4. स्पाइक-ईआर: एक्सटेंडेड रेंज या और ज्यादा रेंज वाली मिसाइल। इसकी रेंज 8 किलोमीटर है।
  5. स्पाइक निलोस (NLOS): यह अल्ट्रा-लांग रेंज मिसाइल है जो 25 किलोमीटर तक मार करती है। राफेल के इंजीनियर इस मिसाइल की कार्य-क्षमता को और बेहतर बनाने के काम में जुटे हैं।

अमेरिकी जैवलिन मिसाइल:जैवलिन फायर एंड फॉर्गेट मिसाइल है। यानी निशाना लगाने के बाद लॉक कर देते हैं, उसके बाद यह ऑटोमेटिक सेल्फ-गाइडेंस पर काम करती है। यह मिसाइल बख्तरबंद गाड़ियों, भवनों और दूसरे टार्गेटों के अलावा हैलिकॉप्टरों को भी निशाना बना सकती है।

चीनी मिसाइलेंभारत में फायर एंड फॉर्गेट मिसाइलों का उत्पादन अब होने जा रहा है, पर चीन पहले से ऐसी मिसाइलें बना रहा है। चीन की रेड एरो 12 मिसाइल का प्रदर्शन एयरशो चाइना 2014 में किया गया था। यह मिसाइल इजरायली स्पाइक एमआर और अमेरिकी जैवलिन का मिला-जुला रूप है। यह पोर्टेबल मिसाइल स्पाइक एमआर जैसी है। इसका एक और संस्करण जैवलिन जैसा है।

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