DEFENCE

घाटी में पत्थरबाजों से निपटेगी सुरक्षाबलों की यह ‘साउंड कैनन’

साउंड कैनन पत्थरबाजों के लिए

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों और पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षाबल रबर बुलेट, पैलेट गन के बजाए अब साउंड कैनन का इस्तेमाल करेंगे। इस तकनीक में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तेज शोर का इस्तेमाल किया जाता है। अधिक शोर की वजह से लोगों का वहां रुकना संभव नहीं होगा।





मीडिया खबरों के मुताबिक घाटी में इसके प्रयोग की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस मशीन को रेंज एकासिक डिवाइस (LRAD) कहते हैं। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल साउंड कैनन की खरीद और परीक्षण की प्रक्रिया चल रही है।

साउंड कैनन की खास बात यह है कि 3-4 फीट की दूरी पर इससे निकलने वाले शोर का 153 डेसीबल साउंड प्रेशर रहेगा। 100 फीट की दूरी 121 डेसीबल का दबाव रहेगा। 90 डेसीबल तीव्रता वाली आवाज को प्रतिदिन सुनने से किसी भी इन्सान की सुनने की क्षमता पर नकारात्मक असर होता है। 130 डेसीबल तीव्रता वाली आवाज कानों में दर्द पैदा करती है।

एक सीआरपीएफ अधिकारी के मुताबिक साउंड कैनन में पांच स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देंगी। इसकी निकलने वाली ध्वनि तरंगों को प्रदर्शनकारी सहन नहीं कर पाएंगे, भागने में ही अपनी भलाई समझेंगे।

 

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