DEFENCE

समर नीति: कोरोना के बीच सीमा पर तनाव

सिक्किम सीमा
फाइल फोटो

भारत और चीन की सीमाएं सिक्क्म से लेकर लद्दाख के इलाके तक फिर गर्म हो रही हैं हालांकि  इस बारे में मीडिया रिपोर्टे अतिरंजित भी हैं जिनसे मीडिया को बचना चाहिये। भारत-चीन के बीच संवेदनशील रिश्तों के मद्देनजर मीडिया को  सनसनी पैदा करने वाली और बढ़ा चढाकर रिपोर्टों से बचने की कोशिश करनी चाहिये।  गत 05 06 मई को सिक्किम की सीमा से यह खबर आई कि भारत और चीन के सैनिक आमने सामने हो गए हैं। थलसेना ने इसकी पुष्टि तो की कि सैनिकों के बीच कुछ धक्का मुक्की और पत्थरबाजी तो हुई लेकिन दोनों सेनाओं द्वारा आपसी सहमति से सेनाएं पीछे हटा लेने की रिपोर्टों को मीडिया ने पेश नहीं किया। उत्तरी लद्दाख की पांगोंग झील के इलाके में जरुर कुछ तनाव की स्थिति है लेकिन इसे कुछ मीडिया द्वारा जून, 2017 की डोकलाम घटना से भी बडा होने की शंका जाहिर करने वाली  रिपोर्टें भी जारी की गईं। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण  रेखा पर जब चीनी सेना के दो हेलीकाप्टर उड़ान भर रहे थे तब उन्हें डराने के लिये भारतीय वायुसेना ने अपने दो सुखोई-30 लड़ाकू विमान सीमांत इलाकों में भेज दिये। वास्तव में सचाई यही है कि इस इलाके में भारतीय लडाकू विमान अक्सर ट्रेनिंग उडानों पर रहते हैं और यह संयोग ही था कि जब चीनी सेना के 02 हेलिकॉप्टर वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट उड रहे थे तब उसी वक्त भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 विमान भी उसी सेक्टर में ऊडान भर रहे थे।





ऐसे वक्त जब भारत कोविड-19 की महामारी से जूझ रहा है और कोरोना महामारी के फैलने में चीन की भूमिका को लेकर भारतीय जनमानस में शंकाएं हैं  भारत चीन सीमा पर तनाव पैदा करने वाली रिपोर्टें  चिंताजनक हैं।   चीन को भी सोचना होगा कि  भारत सहित पूरी दुनिया जब कोरोना महामारी से जूझ रही है तब उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर  ऐसी कोई हरकत नहीं करनी चाहिये जिससे मीडिया को सनसनी पैदा करने वाली रिपोर्टें जारी करने का बहाना मिले।  गौरतलब है कि इस साल भारत और चीन के आला नेतृत्व आपसी राजनयिक रिश्तों की स्थापना की 70 वीं सालगिरह  धूम धाम से मनाने का  फैसला कर चुके थे लेकिन कोविड-19 वायरस की मार ने दोनों देशों की योजनाओं  पर पानी पेर दिया।   70 वीं सालगिरह के दौरान चीनी जन मुक्ति सेना ( PLA)  को  भारत से लगी अनिर्धारित सीमाओं पर संयम बरतने का निर्देश चीन के राजनीतिक नेतृत्व  द्वारा दिया जाना जरूरी है। ऐसा नहीं हो कि पेइचिंग और नई दिल्ली में तो राजनेता आपस में गले लगते हुए दिखें औऱ नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के सैनिक  धक्का मुक्की करते हए और पत्थरबाजी करते हुए नजर आएं।

चीनी नेतृत्व की यह नैतिक  जिम्मेदारी बनती है कि वह  यदि भारत से दोस्ती की बातों में गम्भीरता दिखाना चाहता है तो उसे  तनाव के मसलों को भडकाने  से बचना चाहिये। भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बडी आबादी वाले देश हैं. दोनों दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं हैं औऱ दोनों बडी सैन्य ताकत भी हैं। इन खूबियों  वाले देशों को हमेशा आपस में तनाव के  माहौल में रहना न तो आपसी हितों के लिये ठीक है बल्कि इसका विश्व शांति व सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पडता है।

भारत औऱ चीन के राजनेता जब भी आपस में बातें करते हैं दोनों आपस के दो हजार साल के रिश्तों की याद दिलाना नहीं भूलते। इसलिये जरूरी है कि चीन इन भावनाओं की कद्र करते हुए अपने प्राचीन दोस्त देश के साथ सहयोग और मित्रता की भावना से रहे।   भारत और चीन ने आपसी रिश्तों में तनाव के कुछ मसलों के बावजूद आपसी आर्थिक सहयोग और आदान प्रदान का रिश्ता काफी गहरा किया है। जरूरत इस बात की है कि आर्थिक रिश्तों की ताकत पर दोनों देश अपने राजनीतिक रिश्ते भी खुशनुमा बनाएं।

 

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