DEFENCE

Special Report: रक्षा गलियारे में उद्योग के लिये रियायतें काफी नहीं

आयुध फैक्ट्री
फाइल फोटो

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश को रक्षा साज-सामान के  उत्पादन का गढ़ बनाए जाने की पिछले साल पहल की गई थी। इसके लिये  छह जिलों के इर्दगिर्द रक्षा गलियारे बनाने की नींव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी थी। लेकिन  इसमें निवेश के लिये प्राइवेट  सेक्टर  उत्सुक नहीं दिख रहा।





रक्षा इकाईयों में निवेश के इच्छुक व्यावसायिकों का कहना है कि  राज्य  सरकार ने  उन्हें आकर्षित करने के लिये जो प्रस्ताव रखे हैं वे काफी नहीं हैं। निवेशकों का कहना है कि जो रक्षा इकाईयां इस गलियारे से बाहर लगेंगी क्या उन्हें विशेष रियायतें नही मिलेंगी?

प्राइवेट सेक्टर को इस रक्षा गलियारे में निवेश के लिये आकर्षित करने के इऱादे से  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाले रक्षा मंत्रालय ने विशेषज्ञों की सलाह मांगी है। राज्य  के इस रक्षा गलियारे में रक्षा कारखानों  की स्थापना के लिये  रक्षा मंत्रालय ने खास सेक्टर विशेषज्ञों की तलाश शुरू कर दी है जो रिसोर्स पर्सन की हैसियत से निवेशकों को गाइड करेंगे। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय एक नये फॉर्मूले पर भी काम कर रहा है  जिससे निवेश आकर्षित किया जा सकेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस गलियारे को जल्द  से जल्द सक्रिय करने की बात अधिकारियों से कही है। इसके लिये  उन्होंने  स्टेक होल्डरों जैसे उद्योग संगठनों के साथ बैठकें की हैं।

यह प्रस्तावित रक्षा गलियारा छह शहरों लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी औऱ चित्रकूट में स्थापित नोड यानी केन्द्रों में विकसित होगा। इन छह नोडों के इर्दगिर्द करीब पांच हजार हेक्टेयर में  यह रक्षा गलियारा विकसित करने की योजना है जिसकी आधारशिला पिछले साल फरबरी में  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी थी। इस गलियारे में रक्षा से जुड़े  उद्योग लगाने वाले  निवेशकों को विशेष रियायत देने की पेशकश की गई थी। लेकिन सरकार ने  इस  रक्षा गलियारे के अंदर ही निवेश करने वालों को   कई तरह की छूट देने का प्रस्ताव किया है इसलिये निवेशकों का एक जायज सवाल है कि जिन उद्योगों ने इस गलियारे के बाहर रक्षा इकाईयां लगाने के लिये पहले से ही जमीन खरीदी  हैं क्या उन्हें रक्षा गलियारे के तहत मिलने वाली रियायतें और छूटें नहीं मिलेंगी।

इस गलियारे में रक्षा इकाईयां लगाने के इच्छुक निवेशकों  के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव दिये हैं लेकिन निवेशकों  का कहना है कि  ये काफी नहीं हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को रक्षा इकाईयां लगाने वालो के साथ बैठ कर सीधे उनसे सुझाव मांगने चाहिये।  इसके लिये सम्बद्ध मंत्रालयों औऱ राज्य सरकारों के साथ निवेशकों के बीच अधिक  बैठकों और आपसी  सलाहमशविरा की जरुरत है।

राज्य सरकार का सुझाव है कि निवेशकों को जमीन हासिल करने में विशेष वित्तीय मदद से लेकर  खास सैन्य उत्पादों जैसे हथियारों, गोलाबारूद की इकाईयों  को निवेश के क्षेत्रों में शामिल करना होगा।  निवेशकों के  मुताबिक रक्षा कारखाना लगाने के लिये जमीन की लागत शुरु में दस प्रतिशत ही निवेशकों से ली जाए और बाकी राशि का भुगतान सालाना 12 प्रतिशत व्याज की दर से ली जाए।

यह सुझाव दिया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को डिफेंस आफसेट फेसीलिटेशन एजेंसी के साथ सम्पर्क और सलाह करने  में सहयोग करे ताकि वे विदेशी कम्पनियों के आफसेट दायित्वों को पूरा करने के लिये इकाईयां स्थापित कर सकें।  इससे उत्तर प्रदेश के  रक्षा और अंतरिक्ष वैमानिकी पार्कों में रक्षा इकाईयां निवेश करने को उत्साहित होंगी।  यह सुझाव दिया गया है कि इस  गलियारे में लगने वाली रक्षा इकाईयों  को जमीन खरीदने के लिये 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए और   स्टाम्प ड्यूटी को पूरी तरह माफ कर दिया जाए।

 इस रक्षा गलियारे के तहत  लघु,छोटे, मझोले  उद्योगों को समर्थन देने के लिये  एक कामन फेसीलीटेशन सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव है। निवेशकों की मांग है कि बुंदेलखंड के इलाके में लगने वाली इकाईयों को   अतिरिक्त 50  प्रतिशत की पूंजी सब्सिडी दी जाए। इससे राज्य के इस अतिपिछड़े इलाके में उद्योग लगाने के लिये प्रोत्साहन मिलेगा।

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