DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: देश में ही पनडुब्बी बनाने का टेंडर जल्द

परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत
फाइल फोटो

नई दिल्ली। देश में ही 06 नई पनडुब्बियों के निर्माण  के लिए एक महीने के भीतर  टेंडर जारी होने की उम्मीद है। इन पनडुबबियों को हासिल करने पर गत एक दशक से विचार चल रहा था लेकिन यह प्रस्ताव राजनीतिक और नौकरशाही दावंपेंच  में ही फंसा रह गया।





रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार छह पनडुब्बियों के देश में निर्माण के  लिये भारतीय कम्पनी से टेंडर आमंत्रित करेगी जो किसी विदेशी साझेदार के साथ मिलकर भारत में इनका निर्माण करेगी। यह सौदा 45 हजार करोड रुपये का  हो सकता है। इस टेंडर में भारत की सरकारी क्षेत्र की कम्पनी मझगांव डाकयार्ड और प्राइवेट सेक्टर की लार्सन एंड टुब्रो के भाग लेने की सम्भावना है।

ये पनडुब्बियां आज की रणनीतिक मांग के अनुरुप स्टेल्थ क्षमता वाली होगी यानी समुद्र में विचरण करते समय दुश्मन की नौसेना इन्हें अपनी निगाह में नहीं ला सकेगी।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना की पनडुब्बी क्षमता घट कर 16 पर आ गई है जो भारत के समुद्री इलाके हिंद महासागर में निरंतर चौकसी के लिये काफी नहीं मानी जाती  है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती  नौसैनिक गतिविधियों के मद्देनजर भारत को अपनी पनडुब्बी क्षमता में तत्काल भारी बढ़ोतरी की जरूरत है।

मझगांव गोदी में इन दिनों फ्रांस की 06 स्कारपियेन पनडुब्बियों का निर्माण हो  रहा है। इनमें से दो की सप्लाई नौसेना को हो चुकी है। बाकी चार पनडुब्बियां 2022 तक नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसके पहले भारतीय नौसेना के बेडे में रूस की किलो वर्ग की दस पनडुब्बियां  दो दशक पहले शामिल की गई थी।

भारतीय नौसेना के पास देश में ही निर्मित  परमाणु पनडुब्बी अऱिहंत है औऱ इसके अलावा इसी तरह की 02 और परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण पर काम चल रहा  है।

 

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