DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: लद्दाख सीमा पर तनाव दूर करने का रोडमैप तैयार

भारत और चीन सैन्य अभ्यास खत्म
फाइल फोटो

नई दिल्ली। उत्तरी लद्दाख के सीमांत इलाकों में सैन्य तनातनी दूर करने के लिये दोनों देशों की सेनाओं ने चार जगहों से अपने सैनिक पीछे हटाने के एक रोडमैप पर सहमति बना ली है।





विश्वस्त रक्षा सूत्रों ने बताया कि गत 06 जून को चीन के मोलदो सीमांत इलाके में दोनों सेनाओं के आला जनरलों के बीच 07 घंटे तक चली गहन बैठक के दौरान उक्त आशय की सहमति बनने की रिपोर्टें हैं। गौरतलब है कि 06 जून को जनरलों के बीच हुई बैठक को पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने सकारात्मक बताया था और इसके एक दिन बाद 08 जून को चीन के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर 06 जून की वार्ता को सकारात्मक बताते हुए कहा था कि चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग औऱ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच ऊहान और महाबालीपुरम में सीमा पर शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिये जो सहमति बनी थी उसका दोनों पक्ष पालन करने को कटिबद्ध हैं। सैन्य सूत्रों का कहना है कि छह जून की वार्ता में दोनों पक्षों ने आपसी सद्भाव से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य तनातनी दूर करने के लिये दोनों पक्षों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर सहमति हासिल की थी।

गौरतलब है कि चीन के सैनिक पैंगोंग झील इलाके के फिंगर-4 इलाके में 08 किलोमीटर अंदर आ गए थे। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख में ही हाट स्प्रिंग , गलवान नदी और सिक्किम के नाकू ला इलाके में भी चीनी सेनाओं के साथ मुठभेड़ हुई थी। इन दोनों इलाकों से चीनी सैनिकों ने पीछे हटने पर सहमति दी है जिसके तौर तरीकों पर अगले कुछ दिनों के भीतर दोनों देशों के मध्य़म स्तर के सैनिक अफसरों के बीच बैठकें होंगी जो दोनों देशों के जनरलों के बीच हुई सहमति को लागू करेंगे।

गौरतलब है कि गत 05 मई को चीनी सैनिकों से गलवान नदी, पैंगोंग झील और नाकू ला इलाके में तनातनी पैदा हुई थी और तब से दोनों सेनाओं ने भारी संख्या में फौज की तैनाती बढ़ानी शुरू कर दी। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत को 1962 जैसा सबक मिलने की धमकी दी थी। चीनी दैनिक ने भारतीय सेना को आतंकित करने के लिये कहा था कि चीनी सेना ने गलवान नदी, पैंगोंग झील के इलाके में किस तरह के हथियार जमा कर लिये हैं जिनसे भारतीय सेना को धूल चाटने को मजबूर होना पडेगा।

लेकिन चीन पर भारत ने सैनिक और राजनयिक दबाव बनाए रखा और चीनी पक्ष को मजबूर किया कि सैन्य टकराव से इस मसले का चीन हल निकालने को नहीं सोचे।

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