DEFENCE

Special Report: लद्दाख तनातनी पर राजनाथ ने की सेना प्रमुखों से चर्चा

राजनाथ सिंह मीटिंग के दौरान
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सेना में सुधार के मसले पर गठित शेकातकर समिति की सिफारिशों पर विचार करने और लद्दाख के इलाके में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के चार ठिकानों पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच बढते तनाव के मसले पर विचार करने और अगला कदम उठाने के मसले पर यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत के साथ तीनों सेना प्रमुखों की यहां मंगलवार को आपात बैठक बुलाई।





समझा जाता है कि इस बैठक में लद्दाख के गलवान नदी, पेंगोंग झील के इलाकों में चीन के आक्रामक सैन्य रवैये के मद्देनजर भारतीय सेनाओं के सामने विकल्पों पर चर्चा की गई।

भारत ने चीन से मांग की है कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बहाल करे लेकिन चीन ने कहा है कि ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक कि भारत इस इलाके में सड़क निर्माण का काम नहीं रोकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मसले पर दोनों पक्षों के बीच स्थानीय कमांडरों के स्तर पर कुछ दौर की बैठकें हुई हैं लेकिन चीन अपनी जिद पर अड़ा है और इस इलाके में भारतीय सेना को धमकाने के लिये अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाता ही जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक इस मसले पर कम से कम छह दौर की बातचीत दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच हो चुकी है। इस मसले को सुलझाने के लिये राजनयिक स्तर पर भी सम्पर्क बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक लद्दाख के इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा के तीन-चार किलोमीटर भीतर तक चीनी सेना घुस चुकी है। इसके अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा के पीछे उत्तरी सेक्टर मे पांच हजार से अधिक फौज को तैनात कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना भी तैनाती का जवाबी कदम उठा रही है। भारत की सैन्य तैनाती केवल लद्दाख के इलाके में ही नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के इलाके में भी बढ़ाई जा रही है।

भारत का कहना है कि लद्दाख के इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पीछे भारत सड़क निर्माण का काम करवा रहा है जैसे कि चीन ने भी अपने इलाके में किया है। भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा का कभी भी अतिक्रमण नहीं किया है।

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