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स्पेशल रिपोर्ट: राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से भारत के लिए रवाना

राफेल और मिराज
फाइल फोटो

नई दिल्ली।  भारतीय वायुसेना के लिये फ्रांस में बनाये जा रहे 36 लड़ाकू विमानों में से पहले 05 विमानों की पहली खेप फ्रांस से उड़ान भर चुकी है। ये विमान राफेल बनाने वाली कम्पनी दासो एविएशन के मेरिगनाक कारखाने में बनाए जा रहे हैं।





यहां वायुसेना के प्रवक्ता ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि पहले 05 राफेल विमानों में तीन एक सीट वाले और दो डबल सीट वाले हैं।  राफेल लड़ाकू विमानों को दो चरणों में भारत लाया जाएगा। इन्हें भारतीय वायुसेना के पायलट ही उड़ा कर भारत ला रहे हैं।  भारतीय पायलटों को फ्रांस में ही राफेल विमान उड़ाने की गहन ट्रेनिंग दी गई है।

भारत आने के पहले चरण में उड़ान के दौरान ही आसमान में  राफेल विमानो में इंधन भरे जाएंगे। ईंधन भरने वाले टैंकर विमान फ्रांसीसी वायुसेना  के हैं।  प्रवक्ता ने कहा कि मौसम यदि अनुकूल रहा तो पांचों राफेल विमान 29 जुलाई तक भारत पहुंचेंगे। ये विमान रास्ते में संयुक्त अरब अमीरात के वायुसैनिक अड्डे पर उतरेंगे।

 ये विमान अपने वायुसैनिक स्टेशन अम्बाला पहुंचेंगे जहां  गोल्डन एरो  स्क्वाड्रन नम्बर 17 स्क्वाड्रन में शामिल होंगे।  राफेल विमानों के लिये गोल्डन एरो स्क्वाड्रन का गठन खास कर किया  गया है।

 हालांकि किसी नये लड़ाकू विमान को समाघात तौर पर तैनात करने में कुछ महीने लगते हैं लेकिन इन्हें एक सप्ताह के भीतर लद्दाख के अग्रिम इलाकों पर तैनात किये जाने की योजना है।

लड़ाकू विमान राफेल विमान को आसमानी लड़ाई में खेल का पासा पलटने वाला बताया जा रहा है।

मैरिगनैक कारखाने से राफेल को रवाना करने के मौके पर फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ , दासो एविशय़न के चेयरमैन इरिक ट्रेपियर और अन्य आला अधिकारी मौजुद थे।

इस मौके पर ट्रेपियर ने कहा कि कोविड महामारी के असाधारण दौर में भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय द्वारा दिखाए गए जोश से वह काफी उत्साहित हैं। ये विमान भारत की सम्प्रभुता की रक्षा में अपना योगदान करेंगे। भारत औऱ फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग में हासिल इस नये मील के पत्थर से पता चलता है कि  भारतीय वायुसेना और दासो एविएशन के बीच जो सहयोग 1953 में शुरू हुआ था उसे और मजबूत करते रहने के लिये दोनों पक्ष प्रतिबद्ध हैं। ट्रेपियर ने कहाकि पहले पांच विमानों की खेप रवाना करने से पता चलता हैकि राफेल कार्यक्रम सुगमता से आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा सितम्बर, 2016 में 59 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया था।

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