DEFENCE

Special Report: पैंगोंग झील भी छोड़ना होगा ‘चालबाज’ चीन को

पैंगोल झील के पास गश्त लगाते जवान
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पांच जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन के विदेश मंत्री और स्टेट काउंसेलर के बीच हुई बातचीत के बाद इसके शुरुआती नतीजे जमीन पर दिखने लगे हैं। गलवान घाटी के पेट्रोल प्वाइंट-14 और पेट्रोल प्वाइंट-15 से चीनी सैनिक पीछे हट गए हैं। इसके अलावा हाट स्प्रिंग इलाके से भी चीनी सैनिकों के कुछ पीछे हटने की रिपोर्टे हैं लेकिन यहां सामरिक हलकों मे सबसे बड़ा सवाल यही कौंध रहा है कि क्या चीन पैंगोंग त्सो झील के फिंगर-4 की चोटी को त्याग कर अपने मौलिक फिंगर-8 तक चला जाएगा।





सामरिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक पैंगोंग त्सो झील से चीनी सैनिकों को पीछे हटने को विवश करना ही सबसे बड़ी कामयाबी होगी। भले ही चीनी सैनिक गलवान घाटी और हाट स्प्रिंग के इलाके से अपने सैनिकों को पांच मई के पहले की स्थिति में लौट जाएं जब तक पैंगोंग त्सो झील इलाके से चीनी सैनिक पांच मई के पहले अपने मौलिक तैनाती पर नहीं लौट जाएंगे तब तक भारत का लक्ष्य हासिल नहीं माना जाएगा। भारत की यही शर्त रही है कि चीनी सैनिक पांच मई के पहले की यथास्थिति बहाल करें । भारत का मानना है कि चीन ने पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में एकपक्षीय तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है जिसे जल्द से जल्द समाप्त करना होगा।

चीन और भारत के प्रधानमंत्रियों के सीमा मसले पर बातचीत के लिये नियुक्त विशेष प्रतिनिधियों वांग ई और अजीत डोभाल की वार्ता के बाद दोनों देशों ने जो बयान जारी किया है उसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूर्ण सम्मान करने का वादा चीन ने किया है। लेकिन जब तक जमीन पर चीन अपना यह वादा उतारता नही दिखेगा तब तक भारत और चीन के बीच तनातनी की स्थिति बनी रहेगी।

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