DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा प्रदर्शनी में भारत को रक्षा उत्पादन क्षमता दिखाने का मौका, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

डिफेंस एक्सपो
फाइल फोटो

नई दिल्ली। लखनऊ में 05 से 09 फरवरी तक आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी  डेफ-एक्सपो-2020 के दौरान भारत को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता दिखाने का अनोखा मौका मिलेगा। इस रक्षा प्रदर्शनी में  भारत सहित दुनिया की 900 से अधिक रक्षा कम्पनियों ने अपने रक्षा उत्पादों की नुमाइश के लिये स्टाल आरक्षित किये हैं।





इस प्रदर्शनी में अमेरिका, रूस, यूरोपीय देशों, पूर्व एशियाई  औऱ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से लेकर लातीन अमेरिकी देशों की 144 कम्पनियों ने अपने स्टाल आरक्षित करवाए हैं जब कि भारत की 782 कम्पनियों ने अपने स्टाल आऱक्षित किये हैं। भारत में पहले से ही रक्षा उत्पादन की विशाल ढांचागत सुविधा स्थापित हो चुकी है जिनकी क्षमताओं का अब  सरकार लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत न केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कम्पनियों बल्कि प्राइवेट सेक्टर की नई उदीयमान रक्षा कम्पनियों ने अपने पांव जमाने शुरू किये हैं।

रक्षा प्रदर्शनी डेफ एक्सपो- 2020 इन प्राइवेट कम्पनियों को विदेशी  कम्पनियों की साझेदारी से अपनी उत्पादन क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा। भारत में सैनिक साज सामान के उत्पादन  के लिये चालीस से अधिक लेबोरेट्री हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के 08 विशाल उपक्रम हैं औऱ करीब 40 आयुध कारखाने हैं जिनकी वैज्ञानिक, इंजीनियरी  क्षमताओं और विशाल निर्माण सुविधाओं का लाभ उठाने का मौका डेफएक्सपो देगा।

गौरतलब है कि भारत को रक्षा उत्पादन का मुख्य आधार बनाने के लिये रक्षा मंत्रालय ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा दिया है औऱ इसके तहत विदेशी कम्पनियों से भी कहा है कि  सैनिक साज सामान बनाने की सुविधाएं भारत में स्थापित करने के लिये भारतीय प्राइवेट या सरकारी कम्पनियों के साथ साझेदारी करें।

भारतीय रक्षा कर्णधारों की कोशिश है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आयातक देश के बदले निर्यातक देश का दर्जा हासिल करे। भारत से पिछले साल 10,500 करोड़ रुपये के मूल्य के रक्षा साज सामान का निर्यात हुआ है जब कि इसके पिछले साल 2018-19 के दौरान यह निर्यात 4,682 करोड रुपये का था। इस तरह सरकारी कोशिशों से पिछले साल निर्यात में दो गुना से अधिक का इजाफा एक साल के भीतर ही हुआ।

भारत से बढ़ता रक्षा निर्यात इस बात का सूचक है कि रक्षा निर्यात करने वाले देशों में भारत एक दिन अहम स्थान हासिल करेगा। इसका एक बड़ा लाभ यह होगा कि भारतीय सेनाएं स्वदेशी रक्षा साज सामान पर ही निर्भर करेंगी और जब भारतीय सेनाओं की मांगें स्वदेशी रक्षा कम्पनियां करेंगी तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को तो लाभ होगा ही भारत में लाखों युवकों को रोजगार भी मिलेगा।

भारत में हर दो साल पर आयोजित होने वाला डेफ एक्सपो दुनिया की  प्रतिष्ठित रक्षा  प्रदर्शनियों में शामिल हो चुका है। इस दौरान कई देशों के रक्षा मंत्री और रक्षा कम्पनियों के आला अधिकरी भारत का दौरा करते हैं।

डेफएक्सपो-2020 के दौरान चूंकि भारतीय रक्षा शोध संगठन ( डीआरडीओ) सहित सभी सार्वजनिक रक्षा उपक्रमों औऱ 40 आयुध कारखाने अपने उत्पादो की प्रदर्शनी करेंगे इसलिये विदेशी रक्षा प्रतिनिधियों को भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को देखने का मौका मिलेगा और वे भारतीय ऱक्षा कम्पनियों की साझेदारी से अपने रक्षा उत्पाद भारत मे ही बनाने की योजनाओं को अंजाम देंगे। डेफ एक्सपो- 2020 में अमेरिका, रूस और यूरोप की अग्रणी रक्षा कम्पनियां भाग लेंगी तो भारतीय रक्षा कम्पनियों को उनके साथ बातचीत कर उनके सहयोग से भारत में संयुक्त उद्यम स्थापित करने के  लिये नये अवसर भी मिलेंगे।

गौरतलब है कि भारत के पिछले रक्षा बजट में सैनिक साज  सामान हासिल करने के लिये पूंजीगत व्यय का करीब एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान था। रक्षा अधिकारियों की कोशिश है कि इस पूरे बजट का लाभ भारतीय कम्पनियों को मिले।

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