DEFENCE

Special Report: हथियारों के आयात पर कस्टम ड्यूटी नहीं, सेनाओं को 25 हजार करोड़ की बचत

भारतीय सेनाएं

नई दिल्ली। इस साल रक्षा के लिये आम बजट में 3,18,931 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश 2019-20 के आम  बजट में रक्षा के लिये प्रावधान  को अंतरिम बजट के समान ही रखा है।  तीनों सेनाओं के अलावा सैनिकों की पेंशन के मद में भुगतान के लिये 1 लाख  12 हजार , 79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  इस तरह सेनाओं पर इस साल कुल 4 लाख 31 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।





हालांकि वित् मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट के प्रावधान में बढ़ोतरी नहीं की है लेकिन आयात होने वाले सैनिक साज सामान पर कस्टम ड्यूटी में छूट दे कर 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक  की बचत का मौका दे दिया है।

इस साल के आम बजट में रक्षा का कुल हिस्सा  15.47  प्रतिशत रहेगा।  पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 की तुलना में भारत के रक्षा बजट में 7.93 प्रतिशत की बढोतरी की गई है।  पिछले सालका रक्षा बजट  2,95,511 करोड रुपये था।

रक्षा के लिये 3,18, 931 करोड के कुल बजट में से 2,10.682 करोड राजस्व खर्च के लिये रखा गया है जब कि  एक लाख  8 हजार  248 करोड़ रुपये रखा गया है।  इस बजट से तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण औऱ उनके साज सामान का रखरखाव होगा।  रक्षा बजट में पूंजीगत व्यय  केन्द्र सरकार के कुल पूंजीगत व्यय का  31.97 प्रतिशत हिस्सा है जो बताता है कि देश की सुरक्षा के लिये सबसे अधिक पूंजीगत खरीद सेनाओं को मजबूत बनाने पर ही किया जा रहा है।

आम बजट में सेनाओं को एक औऱ राहत दी गई है। जो रक्षा साज सामान आयात किये जाते हैं उन पर  कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी इससे तीनों सेनाओं को अब भारी राहत मिलेगी।  इससे रक्षा बजट को करीब 25 हजार करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।

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