DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: चीन के साथ वार्ता में प्रगति नहीं

फाइल फोटो

नई दिल्ली। चीन के साथ पिछली सैन्य कमांडर वार्ता 10 अक्टूबर को हुई थी और इसके बाद से पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में हालात में कोई बदलाव नहीं आया है। इस मसले पर विदेश मंत्रालय के बयान से यही आभास मिलता है कि चीन के साथ सैन्य तनाव कम करने के मसले पर चल रही बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई है।





दोनों देशों के राजनयिकों और सैन्य कमांडरों के बीच अगली बातचीत कब होगी यह भी बताने की स्थिति में विदेश मंत्रालय नहीं है। इस बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस बारे में जब कोई सूचना होगी हम आपको बता देंगे। प्रवक्ता ने कहा कि हम सैनिकों को पीछे ले जाने के लिये आपसी सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द से जल्द ऐसा करना चाहते हैं।

यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में पूछे जाने पर इतना ही कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद और सम्पर्क बना हुआ है औऱ दोनों की कोशिश है कि विवादों को झगडों में नहीं बदलने देंगे। यानी भारत और चीन अपनी मांगों पर अडे हुए हैं लेकिन इन्हें मनवाने के लिये कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक राजनयिकों और सैन्य कमांडरों की पिछली बैठकों से दोनों देशों के बीच एक दूसरे की स्थिति को लेकर बेहतर समझ पैदा हुई है। प्रवक्ता के मुताबिक दोनों देश सीमांत इलाकों में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिये संयुक्त प्रयास करते रहने को प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में गत पांच मई से ही चीनी सैनिकों ने अतिक्रमण किया था जिसे भारतीय सैनिकों ने चुनौती दी तो वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। इस इलाके में भारत और चीन की सेनाओं ने अपने 50 हजार से अधिक सैनिक तैनात किये हैं।

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