DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: सैन्य तनातनी से लद्दाख सीमा पर बढ़ा तनाव

गालवान घाटी में तनाव
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के गलवान और पैंगोंग झील इलाके में भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव निरंतर बढ़ता जा रहा है। इन इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने के मसले पर सोमवार को भारत और चीन की सेनाओं के कमांडरों के बीच लम्बी बैठक हुई लेकिन इसका कोई नतीजा दोनों पक्षों ने नहीं बताया है।





गौरतलब है कि 15 जून की रात को गलवान घाटी में हुई खूनी झड़प के बाद से दोनों सेनाओं के बीच तनातनी बढ़ गई है। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि भारत ने की है लेकिन चीनी सेना अपने 43 सैनिकों को खोने की भारतीय मीडिया रिपोर्टों पर मौन है।

यहां सैन्य सूत्रों के मुताबिक गलवन घाटी में चीनी सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा के पीछे धकेल दिया गया है लेकिन इस इलाके में तनातनी बनी हुई है। इसके अलावा पैंगोंग झील इलाके में चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा के आठ किलोमीटर भीतर घुस आई है। चीनी सेना पैंगोंग झील इलाके में आठ पर्वतीय चोटियों में फिंगर- 4 तक चली आई है। पहले भारतीय सेना फिंगर-4 से 8 किलोमीटर ऊपर स्थित फिंगर-8 पर्वतीय चोटी पर तक नियमित गश्ती करती रही है। लेकिन चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को फिंगर-8 तक गश्ती करने से रोक दिया है और वहां अपनी सैन्य तैनाती बढ़ानी शुरू कर दी है।

सोमवार को लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह को बातचीत के लिये चीनी तिब्बत – शिन्च्यांग इलाके के कमांडर मेजर जनरल ल्यु लिन के बीच सुबह 11:30 पर शुरू हुई बातचीत देर शाम तक चलती रही । इससे माना जा रहा है कि दोनों सेनाओं के बीच गहन सौदेबाजी हो रही है। भारतीय सेना की मांग है कि गलवान घाटी और पैंगोंग झील इलाके में दोनों सेनाएं 02 मई की स्थिति को बहाल करें। लेकिन चीनी सेना ने साफ कह दिया है कि किसी भी कीमत पर वह पैंगोंग झील के इलाके को छोड़कर नहीं लौटेगी।

इस बीच रिपोर्ट मिली है कि तिब्बत के इलाके में चीनी वायुसेना के लड़ाकू विमान काफी आक्रामक तरीके से उड़ानें भर रहे हैं ताकि भारतीय सेना में डर पैदा किया जा सके। जवाब में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 और मिराज-2000 उड़ान भर रहे हैं।

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