DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: चीनी सेना को हटाने  के लिए सैन्य कार्रवाई होगी ?

भारतीय सैनिक
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के घुसपैठ और कब्जे वाले इलाकों से चीनी सेना को पीछे जाने के लिये मजबूर करने के लिये भारत का सैन्य विकल्प खुला रहेगा। भारत के प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत ने मीडिया  प्रतिनिधियों से भेंट में चीन को अप्रत्यक्ष चेतावनी दी है कि  यदि चीन ने भारतीय इलाके खाली नहीं किये तो भारत उन्हें पीछे धकेलने के लिये सैन्य कार्रवाई यानी सैन्य हमला कर सकता है।





यहां रक्षा सूत्रों के मुताबिक चीन के आक्रामक रवैये पर यहां रक्षा कर्णधारों ने सोमवार दिन भर चर्चा की। पिछले कुछ दिनों से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल , प्रधान सेनापति जनरल रावत और तीनों सेना प्रमुख आपस में गहन चर्चा कर रहे हैं। तीनों सेना के कमांडर  सम्भावित सैन्य विकल्पों पर सलाहमशविरा कर रहे हैं।

गौरतलब है कि चीनी सेना ने गत पांच मई से पूर्वी लद्दाख के भारतीय इलाकों में घुसपैठ करनी शुरु की थी। ये इलाके गलवान घाटी, गोगरा हाटस्प्रिंग , देपसांग  और पैंगोंग त्सो झील हैं।  भारत ने चीन से कहा है कि चीन पांच मई की पहले की यथास्थिति बहाल करे और अपनी सेना को पीछे ले जाए। इसके साथ ही चीन से यह भी कहा गया है कि  वास्तविक नियंत्रण  रेखा के पीछे तैनात किये गए हजारों सैनिकों को भी हटा ले।

लेकिन चीन अपनी जिद पर अडा है। चीन के साथ इन मसलों पर पांच दौर की राजनयिक स्तर की बातचीत हो चुकी है। दोनों देशों के आला सैन्य कमांडर भी पांच बार गहन बैठकें कर चुके हैं। लेकिन चीन ने बातचीत में भारतीय सेना को उलझा कर भारतीय इलाकों में अपनी सैन्य पकड मजबूत करना जारी रखा।

भारत की ओर से अब तक यही संकेत दिये जाते रहे हैं कि इस मसले को चीन के साथ बातचीत से सुलझाया जाएगा। भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि भारत पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में महीनों तक अपने हजारों सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रहा है। भारत के इस रवैये को चीन ने भारत की कमजोरी समझी । चीनी रणनीतिज्ञों ने यह माना कि भारत सीधी सैन्य कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने जिन इलाकों में अपनी बढत बना ली है उन्हें ही अपनी वास्तविक नियंत्रण रेखा बता रही है।

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