DEFENCE

खास रिपोर्ट: भारत का इस साल का रक्षा खर्च है 4,31,010 करोड़ रुपये

रोमियो हेलिकॉप्टर
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत में सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में रक्षा पर होने वाला खर्च 2.04 प्रतिशत है। सरकार ने पहली बार रक्षा खर्च को रिटायर्ड सैनिकों को दी जाने वाली पेंशन पर होने वाले खर्च को शामिल करते हुए बताया है कि इस वित्तीय साल में रक्षा के लिये 4,31,010 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।





रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने संसद को यह जानकारी देते हुए बताया कि रक्षा पर होने वाला खर्च हर साल बढ़ता जा रहा है। 2016-17 से 2019-20 तक इसके आवंटन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इन तीन सालों में रक्षा खर्च 90,089 करोड़ रुपये बढ़ाया गया है। नायक ने कहा कि यदि हम सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में रक्षा खर्च का आकलन करें तो इससे गलतफहमी पैदा होती है क्योंकि अर्थव्यस्था का आकार लगातार हर साल बढ़ रहा है। इसलिये सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में रक्षा खर्च कम लगता है। यदि अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती है तो रक्षा पर जीडीपी की तुलना में कम खर्च हुआ लगता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि रक्षा पर खर्च कम कर दिया गया है।

राज्य मंत्री ने बताया कि 2019-20 के लिये सिविल औऱ पेंशन पर होने वाला खर्च 4,31,010 करोड़ था जो केन्द्र सरकार के कुल खर्च का 15.47 प्रतिशत है। 2018-19 के लिये यदि पूंजीगत खर्च का हिसाब किया जाए तो यह केन्द्र सरकार के कुल पूंजीगत खर्च का 31.97 प्रतिशत है। राज्य मंत्री ने कहा कि वास्तविक खर्च लगातार बढ़ते जाने की प्रवृत्ति देखी गई है। सरकार नै सैन्य मुख्यालयों को खर्च की सीमा में भारी बढ़ोतरी की है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आई है औऱ आवंटित रक्षा बजट का सम्पूर्ण इस्तेमाल हुआ है।

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