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Special Report: मालदीव में ढांचागत विकास में चीन को पछाड़ेगा भारत

पीएम मोदी मालदीव दौरे पर
फाइल फोटो

नई दिल्ली। नवम्बर, 2018 में राष्ट्रपति सोलिह के सत्ता में आने के बाद से भारत और मालदीव के आपसी रिश्तों को नया आयाम मिलने लगा है। हाल तक चीन के प्रभाव में आने वाले करीब 600 द्वीपों के देश मालदीव की राजधानी माले को पडोस के तीन द्वीपों से जोड़ने के एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को भारत ने मंजूरी दी है जिसके लिये 50 करोड़ डालर का वित्तीय अनुदान और कर्ज देने का ऐलान मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की गुरुवार को हुए वीडियो कांफ्रेंस के दौरान किया गया।





इस वित्तीय मदद से राजधानी माले को पड़ोस के 03 द्वीपों विलिंगिली , गुलहीफालहू और थिलाफुशी को जोडने के लिये 6.73 किलोमीटर का पुल और काजवे का निर्माण किया जाएगा। इसके पहले मालदीव में चीन द्वारा राजधानी माले को दो द्वीपों हुलहुले और हुलहूमाले को 1.39 किलोमीटर लम्बे चाईना मालदीव फ्रेंडशिप पुल से जोडने का सबसे बडा ढांचागत प्रोजेक्ट दिखाई पडता है।

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक भारत ने मालदीव को विभिन्न मदों के लिये अब तक दो अरब डालर का वित्तीय अनुदान औऱ कर्ज मुहैया कराया है।

राजधानी माले और तीन दवीपों को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट को ग्रेटर माले कनेक्टीविटी प्रोजेक्ट (GMCP) कहा गया है। जीएमसीपी के जरिये मालदीव का आर्थिक चेहरा बदला जा सकता है। जीएमसीपी के बन जाने के बाद मालदीव में दूसरे ढांचागत प्रोजेक्ट (चीन द्वारा बनाए गए) बौने दिखाई पडेंगे। जीएमसीपी मालदीव का अब तक का सबसे बड़ा ढांचागत प्रोजेक्ट होगा। इस प्रोजेक्ट के जरिये मालदीव में भारत की न केवल उल्लेखनीय मौजूदगी दिखाई पड़ेगी बल्कि वहां भारत अपनी विशेषज्ञता की नुमाइश भी करेगा। राष्ट्रपति सोलिह ने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान इस प्रोजेक्ट को शुरू कराने का वादा जनता से किया था।

जीएमसीपी प्रोजेक्ट के तहत गुलहीफालहू द्वीप पर भारत एक बंदरगाह प्रोजेक्ट को भी खड़ा करने में मदद पहुंचाएगा। उक्त तीनों द्वीपों को औद्योगिक विकास द्वीप कहा गया है जहां औद्योगिक गतिविधियों के जरिये मालदीव के युवकों को रोजगार मिलेगा।

कोविड महामारी की वजह से मालदीव में पर्यटन औऱ मछली उद्योग का धंधा काफी चौपट हुआ है। लेकिन इसे फिर से बहाल करने में भारत ने मदद करने का वादा किया है। आर्थिक संकट से उबरने के लिये मालदीव ने भारत से वित्तीय मदद का आग्रह किया था। मालदीव के आय व्यय में साढे 39 करोड़ डालर का घाटा हो रहा है जिससे मालदीव सरकार के लिये काम चलाना मुश्किल हो गया है। भारत ने अब तक किसी अन्य पड़ोसी देश को कोविड महामारी से पैदा संकट से निबटने के लिये इतनी बड़ी मदद नहीं दी है।

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