DEFENCE

Special Report: भारत, अमेरिका करेंगे रक्षा प्रणालियों का साझा विकास

भारत-अमेरिका का झंडा

नई दिल्ली। रक्षा तकनीक के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिये भारत और अमेरिका के बीच अहम प्रगति हुई है। भारत और अमेरिका के बीच दिवपक्षीय रक्षा सहयोग के तहत यहां रक्षा तकनीक और व्यापार पहल(डीटीआईआई) की 9वीं बैठक सम्पन्न हुई जिसमें कई शस्त्र प्रणालियों के साझा विकास पर सहमति हुई। इस दौरान कुछ खास प्रोजेक्टों को सम्पन्न करने पर एक इच्छा पत्र पर दस्तखत किये गए। इससे दोनों पक्षों के बीच चुनिंदा प्रोजेक्टों पर साझा काम करने का संकल्प जाहिर होता है।





इस बैठक की सहअध्यक्षता भारतीय रक्षा उत्पादन सचिव सुभाष चंद्र औऱ अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन में रक्षा खरीद और प्रबंध विभाग की अवर सचिव एलन एम लार्ड ने की। यहां रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा व्यापार रिश्तों पर दोनों देशों के आला नेतृत्व का ध्यान केन्द्रित करना और रक्षा साज सामान के साझा उत्पादन और विकास के अवसर पैदा करना है।

इस बारे में जानकारी देने के लिये डीटीआईआई के तहत गठित संयुक्त कार्यदलों के बीच हुई सहमतियों की जानकारी दी गई। इस दौरान विभिन्न प्रोजेक्टों पर हुई प्रगति की भी जानकारी दी गई। इस बैठक के दौरान सुभाष चंद्र ने कहा कि हालांकि डीटीआईआई एक सतत प्रक्रिया है दोनों पक्ष अब कुछ खास नतीजे देने वाले फैसलों तक पहुंच गए हैं। डीटीआईआई का मुख्य उद्देश्य रक्षा उद्योग के साथ तालमेल बनाए रखना है।

एलन लार्ड ने कहा कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का उद्देश्य रक्षा गठजोडों और साझेदारी को मजबूत करना है। डीटीआईआई अब इतना परिपक्व हो गई है कि अब इसकी विभिन्न गतिविधियों को ठोस नतीजों में बदला जा सकता है। सुभाष चंद्र ने कहा कि भारत सरकार अमेरिकी सरकार के साथ तालमेल से काम करने और दोनों देशों के रक्षा उद्योंगों के बीच सहयोग को सुविधा प्रदान करने को प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के साझा विकास और सह उत्पादन के लिये दिवपक्षीय रक्षा सहयोग के तहत डीटीआईआई की स्थापना हुई थी।

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