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स्पेशल रिपोर्ट: विदेश सचिव से वार्ता के नेपाल के प्रस्ताव पर भारत मौन

भारत और नेपाल का झंडा
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के इलाके को नेपाल द्वारा अपने मानचित्र में दर्शाने को भारत ने एकपक्षीय कार्रवाई बताया है। नेपाल द्वारा उत्तराखंड के इन इलाकों को अपने देश का भौगोलिक हिस्सा बताकर भारतीय विदेश सचिव के साथ बातचीत करने के प्रस्ताव का भारत ने कोई जवाब नहीं दिया है।





नेपाल के इस आग्रह के बारे में पूछे जाने पर यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कोई जवाब नहीं दिया और इतना ही कहा कि भारत ने इन मसलों पर पहले ही अपनी स्थिति साफ कर दी है। भारत नेपाल के साथ सभ्यतागत, सांस्कृतिक और दोस्ताना रिश्तों को काफी महत्व देता है। भारत और नेपाल के बहुआयामी रिश्तों ने काफी विस्तार लिया है और नेपाल के विकास , आवागमन और मानवीय सहायता प्रोजेक्टों में भारत ने मुख्य तौर पर ध्यान दिया है।

प्रवक्ता ने कहा कि नेपाल सहित दोस्त पड़ोसी देशों के साथ भारत सम्पर्क बनाए हुए है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोविड-19 से निपटने की साझा रणनीति के तहत किया जा रहा है। भारत ने नेपाल को करीब 25 टन पारासीटोमाल और हाइड्रोक्सीक्लोरीक्वीन दवाएं सप्लाई की हैं। भारत सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कोविड महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के मद्देनजर नेपाल को जरूरी सामान की सप्लाई में कोई बाधा नहीं पहुंचे। भारत ने विदेशों में फंसे नेपाली नागरिकों को भी स्वदेश लौटने में मदद की है।

गौरतलब है कि गत 8 मई को भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा लिपुलेख हो कर तिब्बत के भीतर कैलाश मानसरोवर जाने वाले 80 किलोमीटर लम्बे मार्ग का उद्घाटन करने के बाद नेपाल तिलमिला गया औऱ उसने लिपुलेख के इलाके को नेपाल का प्रादेशिक हिस्सा बताते हुए नेपाल के मानचित्र में इसे शामिल करने वाला एक संविधान संशोधन विधेयक संसद में पेश किया है।

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