DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: भारत ने दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य तैनाती का किया विरोध

दक्षिण चीन सागर

नई दिल्ली। भारत ने दक्षिण चीन सागर के सैन्यकरण का खुल कर विरोध किया है। बैंकॉक में 10 आसियान देशों की रक्षा मंत्री वार्ता को सम्बोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने चीन का सीधा नाम नहीं लिया लेकिन इशारों में कहा कि दक्षिण चीन सागर का विसैन्यीकरण होना चाहिये।





गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर को चीन अपना सागरीय इलाका बताता है औऱ इसकी रक्षा के लिए उसने कृत्रिम द्वीप बनाएं हैं जिस पर मिसाइलों और अन्य हमलावर प्रणालियों को तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा इस सागरीय इलाके में चीन के नौसैनिक पोत विचरण करते रहते हैं।

बैंकॉक बैठक में चीन के रक्षा मंत्री की मौजूदगी में भारतीय रक्षा मंत्री द्वारा उक्त आशय का बयान दिया जाना काफी अहम है। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के 10 सदस्य देशों की छठी आसियान एडीएमएम प्लस वार्ता को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सागरीय इलाके में सुरक्षा तभी सुनिश्चित की जा सकती है जब सभी देशों के हितों को ध्यान में रखा जाए। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का हिंद-प्रशांत नजरिया सतत सुरक्षा की अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये समावेशी और नियम आधारित व्यवस्था होनी चाहिये।

दक्षिण चीन सागर के लिये आचार संहिता के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान के रक्षा मंत्रियों की सभी बैठकों में भारत ने सक्रिय भूमिका निभाई है और इसकी कामयाबी में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने सैन्य औषधि पर आसियान देशों की एक बैठक आयोजित की है। उन्होंने कहा कि भारत अगले साल मानवीय राहत पर एक बैठक की सहअध्यक्षता करना चाहता है।

रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की चर्चा करते हुए कहा कि आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने की साजिशों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय सख्ती से निबटे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके वित्तीय ढांचे को भी ध्वस्त करने के लिये कदम उठाए।

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