DEFENCE

Special Report: सैन्य तनातनी को लेकर भारत-चीन वार्ता नतीजों का इंतजार

भारत-चीन का झंडा
फाइल फोटो

नई दिल्ली। गत 05 मई से भारत और चीन के बीच उत्तरी लद्दाख के इलाके में चल रही सैन्य तनातनी को दूर करने के लिये निचले स्तर के सैन्य अधिकारियों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाने के बाद अब दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत के नतीजों का इंतजार दोनों देशों के सैन्य और सामरिक हलकों में उत्सुकता से प्रतीक्षा की जा रही है।





इस बातचीत के लिये भारतीय थलसेना के 14 कोर के कमांडर को चीन के शिन्चयांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर से बातचीत के लिये भेजा जाएगा।

इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा तय होगी। यदि दोनों देशों के बीच उत्तरी लद्दाख के सीमांत इलाकों में सैन्य तैनाती को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाती है तो दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव काफी बढ सकता है। माना जा रहा है कि अपने सामरिक हितों की रक्षा के लिये भारत को कडा रवैया अनपाना होगा लेकिन इस बार चीन ने भारत को धमकाने के लिये अपनी और के इलाके में भारी सैन्य तैनाती कर दी है।

जवाब में भारत ने भी अपनी बोफोर्स तोपों को वास्तविक नियंत्रण रेखा के इलाकों में भेजना शुरु कर दिया है। इस इलाके में एक हवाई पट्टी को भी तैयार किया जा रहा है ताकि जरुरत पडने पर वहां से परिवहन विमानों के जरिये लडाकू सैनिकों को भेजा जा सके।

सैन्य पर्यवेक्षकों के मुताबिक हालात काफी तनावपूर्ण चल रहे हैं औऱ ऐसे में युद्ध छिडने की सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। भारत की मांग यदि चीन ने मानने से इनकार कर दिया कि वह एक अप्रैल की यथास्थिति बहाल करे तो भारत को उन्हें पीछे हटाने के लिये अपने सैनिकों को आगे भेजना होगा जिससे दोनों सेनाओं के बीच झड़प हो सकती है। यह झड़प कोई बडा संघर्ष का रूप भी ले सकता है इसे लेकर दोनों देशों के राजनयिक हलकों में चिंता है। भारतीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीनी सैनिकों ने 50-60 वर्ग किलोमीटर के भारतीय इलाके में कब्जा कर लिया है। इसे छुडाना भारतीय सेना के लिये बडी चुनौती होगा।

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