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स्पेशल रिपोर्ट: भारत-ऑस्ट्रेलिया गहरा करेंगे रक्षा सहयोग

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्काट मारीसन
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारतीय कूटनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार होगाकि दो देशों के बीच शिखर बैठक वीडियो के जरिये होगी। पहली बार ऑस्ट्रेलिया और भारत के प्रधानमंत्रियों के बीच चार जून को वर्चुअल समिट होगा जिसमें दोनों देशों के प्रधानमंत्री औऱ आला राजनयिक अपनी अपनी राजधानियों में ही बैठे होंगे और वीडियो के जरिये एक दूसरे के साथ शिष्टमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। इसके पहले दोनों नेताओं के बीच अकेले में भी वैसे ही बातचीत होगी जैसे कि शिखर बैठक में शारीरिक मौजूदगी के दौरान होता है।





गौरतलब है कि भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मार्च महीने में ही शिखर बैठक होने वाली थी। लेकिन पहले तो आस्ट्रेलिया में जंगली आग और फिर कोरोना महामारी की वजह से प्रधानमंत्री स्काट मारीसन के भारत दौरे को स्थगित करना पडा। कोरोना महामारी की वजह से आवागमन पर चल रही रोक की वजह से भारत और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों ने वर्चुअल समिट करने का फैसला किया।

यहां आस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बेरी ओ फेरेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद अच्छे दोस्तों की तरह हमने आपसी सम्पर्क बनाए रखा है। आस्ट्लिया भारत शिखर बैठक के दौरान दोनों देश आपसी रक्षा और सामरिक सहयोग को गहरा करने के नये कदम उठाएंगे। इसमें दोनों देशों के बीच परस्पर लाजिस्टिक्स सपोर्ट अग्रीमेंट पर दस्तखत शामिल है।

उच्चायुक्त ने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया के बीच बढते सागरीय सुरक्षा में बढते सहयोग की वजह से इस तरह का समुद्री सहयोग समझौता काफी अहम साबित होगा। गौरतलब है कि दोनों देश अब नियमित तौर पर साझा नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं ताकि हिंद महासार की सुरक्षा और स्थिरता में दोनों देश बेहतर तालमेल से सहयोग कर सकें। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत के दौरान हिंद प्रशांत इलाके में आपसी हितों के मसलों पर भी चर्चा होगी।

दोनों देश संवेदनशील खनिज सप्लाई की चेन बनाए रखने के लिये भी आपसी सहयोग पर बातचीत करेंगे। गौरतलब है कि भारत और आस्ट्रेलिया दोनों खनिज सप्ताई के लिये काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। दोनों देश इस सप्लाई चेन का विकल्प तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें भारतीय उद्योगों की अहम भूमिका होगी।

उच्चायुक्त ने कहा कि कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में दोनों देश क्षेत्रीय और बहुपक्षीय संस्थानों में मिल कर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि चीन से फैली कोरोना महामारी के प्रबंध में चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और भारत और आस्ट्रेलिया ने इस बारे मे समान रुख अनपाया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मौजूदा दौर औऱ इसके समापन के बाद के दौर में महत्वपूर्ण साझेदारों और समान विचार वाले जनतांत्रिक देशों का साथ मिल कर काम करना काफी अहम होगा।

कोरोना महामारी की वजह से भारत और आस्ट्रेलिया के बीच शैक्षणिक सम्बन्धों पर पडने वाले असर के बारे में उच्चायुक्त ने कहा कि आस्ट्रेलिया में जो भारतीय छात्र हैं उनकी अच्छी देखभाल की जा रही है। आस्ट्रेलियाई अधिकारी यह देख रहें है कि विदेशी छात्रों के लौटने और आस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिये किस तरह सुरक्षित व्यवस्था की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हम अपनी शैक्षणिक संस्थाओं पर गर्व करते हैं। गौरतब है कि आस्ट्रेलिया में एक लाख से अधिक भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

लद्दाख के इलाके में भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के बारे में पूछे जाने पर उच्चायुक्त ने कहा कि यह भारत और चीन का आपसी मामला है जिसे दोनों देश दिवपक्षीय बातचीत से सुलझा लेंगे लेकिन उन्होंने दक्षिण चीन सागर और हांगकांग को लेकर हाल में चीन द्वारा उठाए गए आक्रामक कदमों पर चिंता जाहिर की औऱ कहा कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरुप सागरीय औऱ हवाई आवागमन पर किसी तरह की रोक नहीं होनी चाहिये।

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