DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: सीमा पर तनाव घटाने के लिए भारत और चीन प्रतिबद्ध

लद्दाख सीमा पर भारतीय सेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के कई सीमांत इलाकों पर भारत और चीन के सैनिकों के आमने सामने तैनात होने से पैदा स्थिति से निबटने के लिये भारत और चीन की सेनाओं ने तनाव दूर करने के लिये कदम उठाने पर सहमति दी है और दोनों पक्ष इसके लिये प्रतिबद्ध हैं।





यहां सैन्य सूत्रों ने कहा कि प्राथमिकता के तौर पर दोनों सेनाएं क्रमिक और चरणबद्ध तरीके से तेजी से कदम उठाने को सहमत हुई हैं। इसके लिये कोई समय सीमा नहीं निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी, देपसांग , हाट स्प्रिंग और पैंगोंग झील के इलाके में आमने सामने तैनात हैं और दोनों सेनाएं अपनी तैनाती में इजाफा करती जी रही हैं। चीनी सेना ने इन इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन कर भारतीय इलाको में अपने पांव जमा लिये हैं। जिससे इन पूरे इलाकों में भारी तनाव की स्थिति है।

दोनों सेनाओं के क्षेत्रीय सैन्य कमांडरों की 30 जून को भारत के चुशुल इलाके में हुई 12 घंटे की बैठक के बाद यहां सैन्य सूत्रों ने बताया कि गत छह जून को दोनों कमांडरों के बीच हुई पहली बैठक में जो सहमति बनी थी उसके अनुरुप दोनों सेनाएं पीछे हटने के कदम उठाएंगी। छह जून की कमांडरों की बैठक की पृष्ठभूमि में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच 17 जून को वार्ता में यह सहमति बनी थी कि दोनों पक्ष हालात को जिम्मेदार तरीके से सम्भालेंगे और दोनों पक्ष छह जून को सैनिकों के एक दूसरे से दूर हटने की सहमति को लागू करेंगे।

सैन्य सूत्रों ने बताया कि दिवपक्षीय समझौतों के अनुरुप वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति व स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये सैनिक और राजनयिक स्तर पर दोनों पक्षों के बीच और बैठकें होने की उम्मीद है। दोनों कमांडरों की यह तीसरी बैठक थी। पहली बैठक छह जून और दूसरी बैठक 22 जून को हुई थी। इसके बाद 24 जून को दोनों देशों के विदेश मंत्रालयो के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई थी। यह बातचीत सीमा मसलों पर सलाह और समन्वय के लिये गठित वर्किंग मैकेनिज्म ( WMCC) के तहत हुई थी।

30 जून को लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और साउथ शिन्चयांग इलाके के चीनी कमांडर मेजर जनरल ल्यु लिन के बीच हुई बैठक को कोविड-19 महामारी के प्रोटोकोल के अनुरुप पेशेवर तरीके से आयोजित किया गया। यहां सैन्य सूत्रों ने बताया कि इन वार्ताओं से यह परिलक्षित हुआ कि दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव घटाने को प्रतिबद्ध हैं। सूत्र ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेनाएं पीछे हटाने की प्रक्रिया जटिल है।

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