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Special Report: गलवान घाटी हमारी है- भारत

गलवान घाटी
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में सीमांत गलवान घाटी को चीन द्वारा अपना भूभाग बताए जाने पर भारत ने कड़ा एतराज किया है और कहा है कि भारत और चीन के बीच हाल में जो सहमति हुई है उसकी भावना के विपरीत चीन का बयान है।





यहां भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में पूछे जाने पर अपनी टिप्पणी में कहा कि अतिशयोक्तिपूर्ण और नहीं साबित होने वाला दावा भारत और चीन के बीच विकसित हुई सहमति की भावना के विपरीत है।

गौरतलब है कि गलवान नदी घाटी के इलाके पर साल 1962 के युद्ध के दौरान चीनी सेना ने हमला किया था लेकिन युद्ध के बाद वह वापस चली गई थी। गलवान घाटी का इलाका हमेशा ही लद्दाख का इलाका रहा है और वहां लद्दाखी लोग ही रहते हैं।

इस बीच गलवान घाटी इलाके में तनाव खत्म करने के इरादे से दोनों पक्षों के बीच मेजर जनरल स्तर की बातचीत का तीसरा दौर बेनतीजा रहा है। चीन के आक्रामक रवैये की वजह से भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लम्बी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बना हुआ है। भारतीय सेना इस पूरे इलाके पर मुस्तैद है और इस इलाके में वायूसेना के विमान उडान भर रहे हैं।

गलवान घाटी पर चीन के दावे को लेकर भारतीय प्रवक्ता ने बुधवार को भारत औऱ चीन के विदेश मंत्रियों के बीच फोन बातचीत का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि छह जून को भारतीय सैन्य कमांडरों के बीच हुई बातचीत का हवाला इसमें दोनों पक्षों ने दिया और कहा कि सीमांत इलाके पर शांति बनाए रखने के लिये जो सहमति विकसित की थी उसका पालन किया जाए।

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