DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: भारत और चीन की चौथी बैठक गुरुवार को

सीमा पर भारत-चीन के सैनिक
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के सीमांत भारतीय इलाकों में चीन की सेना द्वारा घुसपैठ करने और वहां से पीछे नहीं हटने के मसले पर भारत और चीन के विदेश मंत्रालयों के संयुक्त सचिव स्तर के राजनयिकों की चौथी बैठक गुरुवार को फिर होगी।





यह बैठक वर्किंग मैकेनिज्म फार कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन आन बार्डर अफेयर्स ( WMCC) के तहत होगी। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्रालयों के तत्वावधान में होने वाली इन बैठकों में चीनी पक्ष अपने सैनिकों को वापस बुलाने की सहमति देता है लेकिन जब इन फैसलों को लागू करने के लिये दोनों देशों के सैन्य कमांडरों की बैठक होती है तो चीनी सेना मुकर जाती है और पीछे हटने से इनकार कर देती है।

यहां राजनयिक सूत्रों ने इस जानकारी की पुष्टि की और कहा कि चीनी सेना से फिर कहा जाएगा कि वह पांच मई से पहले की यथास्थिति बहाल करे और अपने सैनिकों को न केवल वास्तविक नियंत्रण रेखा तक वापस ले जाए बल्कि सीमांत इलाकों में जो भारी सैन्य तैनाती कर ली है उसे हटा ले। चीनी सेना से यह भी कहा जाएगा कि पांच मई से पहले जो सेना जहां तक अपने इलाकों की गश्ती के लिये जाती थी वह अधिकार बहाल किया जाए।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख के देपसांग, पैंगोंग त्सो झील, हाट स्प्रिंग , गोगरा औऱ गलवान घाटी के इलाकों में गत पांच मई से सैन्य तनातनी चल रही है। गलवान घाटी में गत 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच हुई मुठभेड में दोनों देशों के सैनिक हताहत हुए थे। इसके बाद से ही भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच तनातनी और बढ गई है। चीन ने गलवान घाटी झडप के लिये भारतीय सेना को जिम्मेदार ठहराया है।

लेकिन भारत का कहना है कि चीन और भारत के बीच सामान्य दोस्ती के रिश्तों के लिये जरुरी है कि चीन अपने सैनिकों को पांच मई से पहले की स्थिति पर वापस ले जाए।

दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की पिछली बातचीत गत नौ अगस्त को हुई थी जब दोनों देशों के मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों की बातचीत हुई थी। इसके पहले चार दौर की बातचीत लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह औऱ चीन के साउथ शिन्च्यांग इलाके के कमांडर मेजर जनरल ल्यु लिन के बीच हो चुकी है जिसमें चीन की ओर से पेशकश की जाती है कि आपसी समझौता के लिये भारत और चीन बीच का रास्ता तलाशें। यानी भारत अपने नियंत्रण वाले इलाकों को छोड दे।

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