DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: एंटी मिसाइल एस-400 की पहली किश्त का रूस को भुगतान जल्द

एस- 400 डिफेंस सिस्टम
फाइल पोटो

नई दिल्ली। भारत पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की धमकियों के बावजूद भारत रूस से एस-400  एंटी मिसाइल प्रणाली  के सौदे को लागू कर रहा है औऱ इस सौदे पर आगे बढने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप भारत इस साल के अंत तक रूस को पहली किश्त का अग्रिम भुगतान करेगा।





रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक के मुताबिक अडवांस भुगतान मिलने के बाद अगले साल से एस-400 मिसाइलों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी। सैनिक तकनीकी सहयोग के लिये फेडरल सर्विस ( FSMTC)  के उपनिदेशक  ब्लादीमिर द्रुजनोव ने मास्को में बताया कि  एस-400 मिसाइल सौदे का पहला भुगतान जल्द किया जाएगा।  द्रुजनोव ने बताया कि  भुगतान की योजना पर दोनों पक्षों में सहमति  हो गई है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि  अगले साल के अंत तक या 2021 के शुरु में  पहली एंटी मिसाइल सौंप दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पांचों मिसाइल प्रणालियां  2024-25 तक भारतीय सेनाओं को सौंप दी जाएगी।

गौरतलब है कि पांच एंटी मिसाइलों का यह सौदा सवा पांच अरब डालर में हुआ है। यह मिसाइल प्रणाली चीन और पाकिस्तान की बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले से  राजधानी दिल्ली सहित भारत के बड़े शहरों को बचाने के लिये हासिल की जा रही है । इस प्रणाली पर तीन भिन्न मारक दूरी वाली मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। ये मिसाइलें किसी हमलावर विमान से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल को अधिकतम चार सौ किलोमीटर दूर तक ध्वस्त कर सकती हैं।

 उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में  रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के  भारत दौरे में एस-400 मिसाइल का सौदा हुआ  था।

रूसी रक्षा अधिकारी द्रुजनोव के मुताबिक  रूस ने भारत को पनडुब्बियों के साझा उत्पादन की भी पेशकश की है। अब तक रूसी शस्त्र प्रणालियां भारत में लाइसेंस पर बनाई जाती रही हैं।  रूस ने कहा है कि रूस की आमूर-1650 पनडुब्बियों के आधार पर भारत में  भी इसी तरह की पनडुब्बी बनाई जा सकती हैं।  द्रुजनोव के मुताबिक भारत में उत्पादन के लिये भारतीय पक्ष से  इसकी सभी तकनीक साझा की जाएगी।  गौरतलब है कि भारत की छह पनडुब्बियों के लिये रूस के अलावा स्वीडन, फ्रांस  और जर्मनी की कम्पनियां रुचि ले रही हैं।

रूसी अधिकारी के मुताबिक अमेरिका के विरोध औऱ धमकियों के बावजूद भारत के हथियार सौदों  में रूसी कम्पनियां भाग लेती रहेंगी। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से किसी को कोई लाभ नहीं होता है।  हम इनसे बचने के तरीके निकाल लेते हैं। चूंकि हमने एस-400 प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के उपाय खोजे हैं इसलिये हम  प्रोजेक्ट- 11356 युद्धपोतों के अलावा कलाशनिकोव राइफलों के सौदे भी किए। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि भारत और रूस लड़ाकू विमान  के सौदे में भी भाग ले सकेंगे।

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