DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: पूर्वी लद्दाख के इलाके पर  दोनों सेनाओं की तैनाती बढ़ी

लद्दाख में वायुसेना का अभियान
फाइल फोटो

नई दिल्ली।  पूर्वी लद्दाख के इलाके में भारत चीन सीमाओं पर चीन के अड़ियल रुख की वजह से तनाव बढने के संकेत हैं। चीन द्वारा इस इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय इलाके में सड़क बनाने से रोकने औऱ अपने वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास नये बंकरों के निर्माण से भारतीय सेना सचेत हो गई है और वहां अपनी नई  सैन्य टुकड़ियां भेज रही हैं। चीन ने इस इलाके में 80 टेंटों में पहले से ही अपने सैनिकों के तैनात होने के लिये इंतजाम कर लिये  हैं। प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक पूर्वी लद्दाख के तीन इलाकों  पर दोनों देशों के सैनिक आमने सामने तैनात हों चुके हैं।





दो दिनों पहले भारत ने चीन से साफ कह दिया था कि वह चीनी बंदरघुड़कियों से नहीं डरेगा औऱ अपनी सम्प्रभुता औऱ प्रादेशिक एकता की पूरी मुस्तैदी से रक्षा करेगा।  भारतीय विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद थलसेना प्रमुख जनरल  मुकुंद नरवाणे ने पश्चिमी सेक्टर के कमांडरों के साथ ताजा हालात और भारतीय सैन्य तैयारी की समीक्षा की है। जनरल नरवाणे ने शुक्रवार को लद्दाख का दौरा किया था। चीन ने खासकर पेंगोंग झील औऱ गलवान नदी के इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा का हनन किया है और भारतीय सेना को चुनौती दी है।

गौरतलब है कि इस महीने के शुरू से ही लद्दाख औऱ सिक्किम  के इलाकों में चीनी सेना ने भारतीय सेना के साथ तनाव मोल लिया है। भारत द्वारा चीनी सेना की चुनौती स्वीकार किये जाने के बाद चीनी सेना ने अपनी तैनाती में इजाफा करना शुरु किया है। पिछले सप्ताह चीनी दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने भी सीमा पर  तनाव की रिपोर्टों के साथ कहा था कि भारतीय सेना को इसके नतीजे भुगतने होंगे। चीन ने इस तरह अपने मीडिया के जरिये ठीक उसी तरह दबाव बनाने की कोशिश की है जैसा कि साल 2017 के जून नें भूटान के डोकलाम के इलाके में 73 दिनों तक भारतीय सेना के साथ आमने-सामने की तैनाती की थी।

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