DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा मंत्री ने लद्दाख के ताजा हालात पर ली जानकारी

रक्षा मंत्री ने किया पोर्टल लॉन्च
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गत 05 मई से चीनी सैनकों के साथ चल रही तनातनी को दूर करने के लिये चल रही बातचीत और इसका जमीनी असर कितना हुआ इस बारे में ताजा जानकारी लेने के लिये रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत औऱ तीनों सेना प्रमुखों के अलावा अन्य आला सैन्य कमांडरों के साथ शुक्रवार को अहम बैठक की है।





यहां रक्षा सूत्रों ने बताया कि लद्दाख के हालात पर चर्चा करने के लिये राजनाथ सिंह ने दूसरी बार सैन्य जनरलों और कमांडरों के साथ बातचीत की है। सूत्रों ने बताया कि हालांकि गत छह जून की दोनों देशों के आला सैन्य अधिकारियों की चीन के मोलदो इलाके में हुई बातचीत का मामूली सकारात्मक असर ही देखने को मिला है। 06 जून की वार्ता के बाद हालांकि दोनों पक्षों के सैनिक कुछ पीछे हटे हैं लेकिन लद्दाख के इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा के दोनों ओर पीछे के इलाके में सैन्य तैनाती पहले की तरह बनी हुई है।

सूत्रों ने बताया कि चीन पैंगोंग झील औऱ गलवान नदी इलाके से पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहां चीनी सैनिकों ने अपने कैम्प बना लिये हैं औऱ कई तरह के बंकर भी बनाए हैं। चीन इन इलाकों पर जम कर बैठा हुआ है और उसने भारतीय अधिकारियों को साफ कहा है कि वह इन इलाकों से अपने सैनिक नहीं हटाएगा। चीन का कहना है कि वह इलाका चीन का है और चीन वहां से नहीं हटेगा।

चीन का रूख कड़ा बने रहने के मद्देनजर भारतीय सेना ने सम्पूर्ण वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपनी तैनाती बढानी शुरु की है और अपनी सेना को चौकस रहने को कहा है । माना जा रहा है कि भारत पर सैन्य दबाव बनाने के लिये वास्तविक नियंत्रण रेखा के किसी दूसरे इलाके में घुसपैठ या अतिक्रमण कर सकता है।

इस तनातनी के बीच गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि सीमा पर शांति व स्थिरता बनी रहना दोनों देशों के आपसी रिश्तों को आगे बढाने के लिये जरुरी है।

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