DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा मंत्री राजनाथ ने मोजाम्बीक को सौंपे 2 पोत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सौंपे पोत

नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मोजाम्बीक दौरे में रक्षा सहयोग के दो समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए हैं। ये समझौते व्यापारिक पोतों की आवाजाही और जलसर्वेक्षण को लेकर हैं। इसके अलावा राजनाथ सिंह ने भारत निर्मित दो फास्ट इंटरसेप्टर बोट भी मोजाम्बीक की नौसेना को सौंपे।





रक्षा मंत्री के तौर पर अपने पहले विदेश दौरे  राजनाथ सिंह ने  मोजाम्बीक के प्रधानमंत्री कार्लोस अगस्तोनिहो से मुलाकात की और आपसी सामरिक रिश्तों को और गहरा करने पर चर्चा की।  इसके अलावा उन्होंने मोजम्बीक के रक्षा मंत्री के साथ शिष्टमंडल स्तर के बातचीत की। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के दो समझौतों से भारत और मोजाम्बीक के बीच आपसी रक्षा सहयोग और मजबूत होंगे।  यहां आधिकारिक सूत्रें मुताबिक दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते से  दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का नया दौर शुरू होगा जिससे हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सौंपे पोत

रक्षा मंत्री ने मापुतो के दौरे में मोजाम्बीक के सुरक्षा बलों को संचार उपकरण भेंट किये और कहा कि दोनों देशों के सैन्य बलों को मिलकर सुरक्षा खतरों, समुद्री डाकाजनी आदि अपराधिक  मामलों में मुकाबला करना होगा।  मोजाम्बीक के रक्षा मंत्री  कार्लोस अगस्तीन्हो डो रोजेरो ने राजनाथ सिंह से  मुलाकात में   अपने देश के अंदरुनी सुरक्षा हालात की जानकारी दी।

आतंकवाद और जेहादीकरण की चुनौतियों से मुकाबला करने के लिये मोजाम्बीक के रक्षा मंत्री ने भारत के सहयोग की मांग की। मोजाम्बीक की नौसेना को दो पोत सौंपने के मौके पर एक  भव्य समारोह का आयोजन किया गया। ये पोत भारतीय कोस्ट गार्ड ने मोजाम्बीक की नौसेना को सौंपे जिसके लिये कागजात सौंपे गए। इन पोतो के संचालन के लिये भारतीय कोस्ट गार्ड ने एक ट्रेनिंग टीम भी मोजाम्बीक  की नौसेना के साथ तैनात की है। मोजाम्बीक के रक्षा मंत्री ने इन पोतों को सौंपने के लिये आभार भी जाहिर किया है। इन पोतों का इस्तेमाल तटीय चौकसी के लिये मोजाम्बीक की नौसेना करेगी।

मोजाम्बीक में प्रवासी भारतीय भारी तादाद में रहते हैं। दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण रक्षा रिश्ते हाल के सालों में विकसित हुए हैं। हाल में मोजाम्बीक के समुद्री तट पर आए भीषण तूफान से राहत के लिये भारत ने अपने दो युद्धपोत वहां भेजे थे।

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