DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: रक्षा मंत्री ने चीनी घुसपैठ पर सेनाप्रमुखों से की मुलाकात

सेना प्रमुख के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में कई जगहों पर चीनी सेना द्वारा घुसपैठ कर अड्डा जमाने से पैदा तनाव के सिलसिले में  भारत और चीन के  आला सैन्य अधिकारियों के बीच शनिवार को हुई बातचीत के नतीजों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को देश के प्रधान सेनापति और तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक कर चर्चा की है। इस बीच पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में सोमवार को चीनी सेना द्वारा अपने हेलिकॉप्टर भेजने की भी रिपोर्ट मिली है।





गौरतलब है कि शनिवार को पूर्वी लद्दाख के चुशुल इलाके के पार चीन के मोलदो इलाके में भारत औऱ चीन के क्षेत्रीय कमांडरों के बीच 07 घंटे तक गहन बातचीत चली। हालांकि इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला लेकिन यहां भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में सम्पन्न बातचीत कहा है। दूसरी ओर चीनी कम्मुनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी  रिपोर्ट में भारतीय विदेश मंत्रालय का हवाला देते हुए कहा है कि पूर्वी लद्दाख के इलाके में हालात डोकलाम जैसे तो नहीं बनेगें लेकिन इसे सुलझाने में वक्त लगेगा।

शनिवार को हुई बातचीत पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि  भारत चीन सीमा पर पैदा हालात को सुलझाने के लिये  हाल के सप्ताहों में भारत और चीन के अधिकारियों ने स्थापित  राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिये संवाद बनाए रखा है।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि  लेह स्थित कोर कमांडर और तिब्बत स्थित चीनी सैन्य कमांडर के बीच हुई बैठक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई।  दोनों पक्ष  इस मसले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिये तैयार हुए। दोनो पक्षों ने इसे भी नोट किया कि मौजूदा साल में दोनों देश अपने राजनयिक रिश्तों की स्थापना की 70वीं सालगिरह मना रहे हैं  और दोनों इस बात पर सहमत हुए कि सीमा मसले का जल्द हल दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों के अनुकुल होगा। इसी के अनुरुप दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक  संवाद बनाए रखने की प्रतिबद्धता जाहिर की है ताकि सीमा पर शांति व स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

गौरतलब है कि मई के पहले सप्ताह में चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख की गलवान नदी और पैंगोंग झील के इलाके में घुसपैठ कर वास्तविक नियंत्रण रेखा के भारतीय इलाके में घुसी थी जिसे भारत द्वारा सैन्य चुनौती दिये जाने पर दोनों देशों की सेनाओं ने सीमा पर भारी सैन्य तैनाती की है। भारत ने कहा है कि चीनी सेना को अप्रैल के महीने की स्थिति पर वापस जाना होगा। भारत ने चीनी पक्ष से यह भी साफ किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपने इलाके में भारत ढांचागत निर्माण जारी रखेगा।

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