DEFENCE

Special Report: चीनी सेना ने कहा- पैंगोंग त्सो नहीं छोड़ेंगे

चीनी सैनिक
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पिछले 24 जुलाई को भारत और चीन के बीच सीमा मसलों पर सलाह मशविरा के लिये गठित वर्किंग मैकेनिज्म फार  कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (WMCC)  की 17 वीं बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सहमति जाहिर की थी कि  गत पांच जुलाई को दोनों देशों  के सीमा मसले पर विशेष  प्रतिनिधियों की बातचीत में जो सहमति बनी थी  उसे लागू किया जाना चाहिये ।





 24 जुलाई की बैठक में दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के आला अधिकारियों ने तय किया था कि जल्द ही दोनों देशों के क्षेत्रीय सैन्य कमांडरों की बैठक होगी। इस बैठक के पहले गत 30 जुलाई को जिस तरह चीन के राजदूत सुन वेई तुंग ने अपने देश का रुख घोषित किया कि पैंगोंग त्सो झील का इलाका चीन का है उसके बाद सैन्य कमांडरों की बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह  गया था। इसीलिये भारतीय पक्ष इस बातचीत में रुचि नहीं ले रहा था पर शनिवार की शाम को चीनी पक्ष से संदेश आया कि वे दो अगस्त को  पांचवे दौर की सैन्य कमांडरों की बातचीत करना चाहते हैं। काफी झिझक के बाद भारतीय पक्ष तैयार हुआ  और चीन के मोलदो इलाके में बैठक के लिये रविवार सुबह पहुंचे  लेकिन यह बैठक भी छलावे में रखने के लिये बुलाई गई थी। इस बैठक में चीन के सैन्य कमांडर साउथ शिचन्यांग डिस्ट्रिक्ट के मेजर जनरल  ल्यु लिन और लेह स्थित 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने भाग लिया।

 15 घंटे तक चली इस बैठक का भारत के नजरिये से कोई सकारात्कम नतीजा नहीं निकला इसलिये इस बैटक के बाद भारतीय पक्ष ने आधिकारिक या गैर आधिकारिक तौर पर बयान नहीं जारी किया गया। इस बैठक के नतीजों पर  विचार करने के लिये चाइना स्टडी ग्रुप की बैठक में चर्चा का प्रस्ताव है। इस बैठक में तय. होगा कि चीन के अडियल रुख के मद्देनजर भारत का अगला कदम क्या होगा।

 अब तक की रिपोर्टों के मुताबिक चीन ने हाट स्प्रिंग और गलवान घाटी के इलाके से अपने सैनिक पीछे हटाकर वास्तविक नियंत्रण रेखा तक ले गया है लेकिन गोगरा, पैंगोंग त्सो झील और देपसांग इलाके में चीनी सेना जहां है वहां से पीछे हटने को तैयार नहीं। चीनी सेना कहती है कि वह जहां पर है वहीं वास्तविक नियंत्रण रेखा है। इसलिये वह वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करते हुए वहां से पीछे नही हटेगी।

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