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स्पेशल रिपोर्ट: चीन का तीसरा विमानवाहक पोत पांच साल में..

चीन का विमानवाहक पोत

नई दिल्ली। जहां भारत अपने पहले  स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना को सौंपने के लिये पिछले एक दशक से जुटा  है चीन अब अपना दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत पांच साल में हासिल करने की उम्मीद कर रहा है। भारतीय नौसेना का मौजूदा एकमात्र विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य रूस से हासिल किया गया था।





उम्मीद है कि चीन का दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत शानतुंग मंगलवार को लांच करने के बाद इस आशय की रिपोर्टें आने लगी हैं कि चीन तीसरे विमानवाहक पोत के निर्माण में काफी प्रगति कर चुका है और इसे दो साल के भीतर लांच किया जाएगा और इसे चीनी नौसेना को परीक्षणों के बाद सौंपने में तीन साल और लगेंगे।

चीन के पहले रूस से हासिल वरयाग विमानवाहक पोत को ल्याओनिंग पोत का रूप देने वाले चीफ डिजाइनर चू इंगफू के मुताबिक यह पोत अमेरिका के फोर्ड क्लास के करियर पोतों की तर्ज पर बनेगा। इस पोत पर इलेक्ट्रोमैगनेटिक कैटापुल्ट प्रणाली लगी होगी जिससे भारी और बड़े विमानों का टेकआफ करना आसान होगा। इस  कैटापुल्ट से  बड़े आकार वाले हमलावर ड्रोनों और  पूर्व चेतावनी वाले टोही विमान भी टेक आफ कर सकते हैं। कैटापुल्टों की बदौलत विमानों की रिलीज स्पीड को एक तिहाई बढ़ाया जा सकेगा।

माना जा रहा है कि अगले दशक के अंत तक चीन के पास पांच या छह विमानवाहक पोत हो जाएंगे। इन पोतों के जरिये चीन हिंद महासागर में अपनी स्थायी मौजूदगी बना सकता है। इन पोतों पर चीन स्टील्थ लड़ाकू विमानों को भी तैनात कर सकता है और भारत के आसपास के समुद्री इलाकों पर नजदीक से चौकसी रख सकता है।

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