DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: चीन सीमा पर तनाव खत्म होने के आसार

गलवान घाटी
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पिछली पांच मई से चीन सीमा पर चल रहे सैन्य तनाव अब खत्म होने के आसार दिखने लगे हैं। विश्वस्त रक्षा सूत्रों के मुताबिक पिछले 06 नवम्बर को भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडरों के बीच हुई छठे दौर की वार्ता में चीन की ओर से कुछ सकारात्मक प्रस्ताव रखे गए हैं जिन पर भारतीय वार्ताकार विचार कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक चीन के प्रस्ताव को हालांकि भारत सम्पुर्णता में मंजूर नहीं करेगा लेकिन इस पर आगे बढ़ने के लिये चीन से स्पष्ट्रीकरण मांगेगा।





रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच जल्द ही नौंवे दौर की वार्ता तय की जाएगी जिसमें भारतीय सामरिक पर्यवेक्षक कुछ ठोस कदम उठाए जाने के लिये आपसी सहमति बनने की उम्मीद कर रहे हैं।

गौरतलब है कि गत पांच मई के बाद से चीन की पीपल्ल लिबरेशन आर्मी ने पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों पैंगोंग त्सो झील, हाट स्प्रिंग, गलवान गोगरा औऱ देपसांग घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार अतिक्रमण कर भारतीय इलाकों में घुस आए थे। भारतीय सैनिकों ने इन्हें चुनौती दी तो चीन ने अपने सैनिकों को पीछे हटाने से इनकार कर दिया था। चीनी सेना की चुनौती का जवाब देने के लिये भारतीय सेना ने भी उन इलाकों में करीब 50 हजार से अधिक सैनिक टैंकों और तोपों के साथ तैनात कर दिये। चीन ने भी इसी तरह की तैनाती की जिससे कई सीमांत इलाकों में दोनों देशों की सेनाएं अपने टैकों और तोपों के साथ दो से तीन सौ मीटर की दूरी पर तैनात हो गईं जिससे वहां कभी भी युद्ध भडकने की नौबत पैदा हो गई है। भारत की तीनों सेनाओं के प्रधान सेनापति जनरल बिपिन रावत ने पिछले सप्ताह की शंका जाहिर की है कि वहां युद्ध छिडने के हालात बने हुए हैं।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने चीनी सेना से साफ कहा है कि वह अपने सैनिकों को पांच मई से पहले की स्थिति पर वापस ले जाए। भारत ने यह भी कहा है कि चीनी सेना ने जो भारी सैन्य जमावडा किया हआ है वह समाप्त करे और अपने सैनिकों को शांतिकाल के ठिकानों पर वापस ले जाए। चीनी सेना को लग रहा है कि ऐसा करना उसके लिये भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण करने जैसी बात होगी । इसलिये वह अपना चेहरा छुपाने जैसा कोई प्रस्ताव लागू करना चाह रहा है ताकि वह अपनी जनता को बता सके कि उसने अपनी शर्तों पर भारत के साथ समझौता किया है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक हालांकि पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में भारी बर्फबारी शुरु हो गई है और तापमान शून्य से दस-बीस डिग्री नीचे चला गया है , भारतीय सेना ने चीन से साफ कहा है कि वह तब तक वहां से अपने सैनिकों को पीछे नहीं हटाएगा जब तक कि चीन अपने सैनिकों को पांच मई से पीछे हटाने को तैयार नहीं होगा।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने जिस चतुर रणनीति के जरिये चीन पर सैन्य दबाव बनाया उसकी चीन ने कभी उम्मीद नहीं की थी। भारतीय सेना ने जिस तरह पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील के दक्षिण तट वाली चोटियों पर कब्जा कर चीन को भौंचक कर दिया वह बेमिसाल है। भारत के इस कदम के बाद चीन ने प्रस्ताव रखा था कि भारत और चीन पैंगोंग झील के दोनों तटों कीचोटियों से अपने सैनिक वापस बुला लें। लेकिन भारत ने कहा कि पैंगोंग त्सो झील के इलाके से तभी अपने सैनिक पीछे हटाएगा जब पूर्वी लद्दाख के सभी सीमांत इलाकों से चीन अपने सैनिक पीछे हटाने को तैयार होगा औऱ इसके लिये जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठा कर दिखाएगा।

जिस तरह गत 15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने पीछे हटने से मना किया और भारतीय सैनिकों पर धोखे से घेर कर कंटीली बेतों से हमला किया उसके बाद भारतीय सेना कदम फूंक फूंक कर रखना चाहती है। भारतीय सेना चीन के किसी भी कथित समझौता प्रस्ताव को काफी नापतोल कर स्वीकार कर रही है और चीनी सेना के हर प्रस्ताव को शक की निगाह से देख रही है।

सबसे अहम बात यह है कि चीनी सेना की इस रणनीति को नाकाम कर दिया कि वह जब भारतीय इलाके में घुस जाएगी तो भारतीय सेना इसका जवाब देने की स्थिति में नहीं होगी और उसे मजबूरन चीनी सेना के अतिक्रमण को स्वीकार करना होगा। लेकिन जिस साहस के साथ भारतीय सेना ने चीनी सेना का पूर्वी लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर मुकाबला किया है वह काबिले तारीफ है और भारतीय सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के इस संकल्प को दिखाती है कि चीन सेना की धौसपट्टी उसे चिंता में नहीं डाल सकती।

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