DEFENCE

Special Report: साल 2025 तक 26 अरब डॉलर का होगा देश का रक्षा उद्योग

राजपथ पर ब्रह्मोस
फाइल फोटो

नई दिल्ली। वर्ष 2025 तक भारत का रक्षा उद्योग 26 अरब डालर तक हो जाएगा। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने  भारतीय प्राइवेट रक्षा उद्योग को यह उम्मीद दिलाते हुए कहा है कि  सरकार यह लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।





सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चरर्स (एसआईडीएम) की  दूसरी वार्षिक सभा को सम्बोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि  मेक इन इंडिया के तहत रक्षा उद्योग की पहचान सबसे अग्रणी क्षेत्र के रुप में की गई है।  यह 2025 तक भारत को पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था हासिल करने में मदद करेगा।

हथियारों के आयात पर निर्भरता खत्म करने की जरूरत बताते हुए  रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को एक अग्रणी रक्षा उत्पाद बनाने के लिये कई कदम उठाए गए हैं। भारत को रक्षा निर्यात का केन्द्र बनाने की कोशिश चल रही है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य हासिल करने के लिये औऱ कदम उठाए जाएंगे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार की रक्षा उत्पादन नीति से सरकार के इस संकल्प का पता चलता है कि वह 26 अरब डालर का रक्षा उद्योग खड़ा करने के लिये प्रतिबद्ध है। इससे 20-30 लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि रक्षा उद्योग के  तेजी से विस्तार के लिये पिछले कुछ सालों के भीतर सरकार ने समुचित माहौल पैदा करने की कोशिश की है।  सरकार ने रक्षा उत्पादन और खरीद की नीति में सभी पहलुओं से सुधार किये हैं।

उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात के लिये  नीतियों का जिस तरह सरलीकरण किया गया है उससे  2018-19 में  10,745 करोड़ रुपये के रक्षा साज सामान का निर्यात किया जा सका है। यह राशि  2016-17  में हुए निर्यात की तुलना में  सात गुना अधिक है।

 भारत को एक बड़ा रक्षा उद्योग आधार बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि  देश में सार्वजनिक क्षेत्र के नौ  उपक्रम, 41 आय़ुध कारखाने, 50 शोध एवं विकास प्रयोगशालाएं औऱ अऩ्य प्रतिष्ठानें हैं।  इसके अलावा  70 लाइसेंस धारी प्राइवेट कम्पनियां हैं। इनके यहां 1.7 लाख लोग काम करते है। राजनाथ सिंह ने कहा कि  सरकार ने औद्योगिक लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाया है, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा  बढाई है  और रक्षा निर्यात को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं।

इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर के लिये सरकारी टेस्टिंग सुविधा खोल दी गई है। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दो रक्षा औद्योगिक गलियारे खोले गए हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब आठ हजार मझोले उद्योग हैं जो रक्षा उत्पादन से जुड़े हैं। कोशिश है कि इनकी संख्या 16 हजार की जाए। मेक प्रोपोजल के ताहत  औद्योगिक विकास के 40 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। अगले पांच सालों में दो हजार करोड़ रुपये लागत के आठ ऐसे प्रस्ताव जमीन पर आएंगे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि  रक्षा खरीद प्रक्रिया को औऱ प्रभावी बनाने के लिये  सामरिक साझेदारी की नीति लागू की गई है । इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि  लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, पनडुब्बी और बख्तरंवंद वाहन जैसे बड़े हथियार बनाए जा सकेंगे।

देश में एक मजबूत सूचना तकनीक उद्योग की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि  राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिये एक रोडमैप तैयार किया जा रहा है ताकि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आदि तकनीक में भारत प्रगति कर सके।  रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित तकनीक को उद्योग को मुहैया कराने के लिये भी कदम उठाए गए हैं।  रक्षा मंत्री ने कहा कि देश से रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिये हर सम्भव जरूरी सहयोग सरकार देगी।

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