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Special Report: जैव हथियार संधि का सख्ती से पालन हो- भारत

जैविक हथियार
प्रतीकात्मक

नई दिल्ली। बायोलॉजिकल एंड टाकिस्क वेपंस कनवेंशन (BWC) यानी जैविक और जहरीले हथियार संधि के लागू होने की 26 मार्च को 45वीं सालगिरह के मौके पर भारत ने कहा है कि इस संधि का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित करने के लिये एक विश्वसनीय जांच और निगरानी व्यवस्था की जानी चाहिये।





भारत ने कहा है कि जनसंहार के हथियारों के विकास और उत्पादन की यह पहली ऐसी अंतरराष्ट्रीय संधि है जो भेदभाव रहित है जिसमें जनसंहार के सभी किस्मों के हथियारों के उत्पादन पर रोक लगाने की बात है। भारत ने इस अंतरराष्ट्रीय संधि को हमेशा अहमियत प्रदान की है। यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव के बारे में कहा कि हम इस संधि के वैश्वीकरण और पूर्ण और प्रभावी तरीके से व्यवहार में लाने को हम सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत यह दृढ़तापूर्वक मानता है कि जैव हथियार संधि को नयी उभरती वैज्ञानिक घटनाओं द्वारा पैदा चुनौती से निबटने के लिये सख्ती से मुकाबला करने को तैयार रहना होगा। इसी के मद्देनजर इस संधि की अगले साल होने वाले नौंवें समीक्षा सम्मेलन के दौरान इस संधि को संस्थागत मजबूती प्रदान करने की जरुरत पर भारत ने जोर दिया। चीन का नाम लिये बिना प्रवक्ता ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से जो वैश्विक आर्थिक और सामाजिक असर हम देख रहे हैं इसने इस बात की जरूरत बताई है कि हमारे बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को मजबूत करने के अलावा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत किया जाए।

प्रवक्ता ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा सूक्ष्म जीवों का जैविक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के खतरों के बारे में भारत संयुक्त राष्ट्र को आगाह करता रहा है। इसके लिये भारत हर साल संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करता रहा है। यह प्रस्ताव जनसंहार के हथियारों के आतंकवादियों तक पहुंचने से रोकने के उपाय नाम से 2002 से हर साल पेश किया गया है।

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