DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: सेना पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं- भारत

गलवान घाटी के करीब भारतीय सेना
फाइल फोटो

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख के  जिन सीमांत इलाकों में चीनी सेना ने घुसपैठ कर ली है वहां से चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पीछे हटने की जो सहमति दी थी उस पर अभी पूरा अमल नहीं हुआ है।





गौरतलब है कि तीन दिनों पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने बयान में दावा किया था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के अधिकांश इलाकों से सेनाएं पीछे हटाने का काम पूरा हो चुका है। लेकिन यहां भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इससे आंशिक सहमति जताते हुए कहा कि  सीमा मसले पर सलाह और  तालमेल के लिये  गठित प्रक्रिया ( WMCC)  पिछली बार हुई 17 वीं बैठक  में सेनाओं के पूर्ण तौर पर पीछे जाने पर सहमति बनी थी। इस पर अमल में प्रगति  होने की  बात भारतीय विदेश मंत्रालय के  प्रवक्ता ने कही लेकिन   कहा कि  विसैन्यीकरण की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।

 गौरतलब है कि गुरुवार की शाम को भारत में चीन के राजदूत सुन वेई तुंग ने  भारतीय बयानों का खंडन करते हुए कहा था कि चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पीछे चली गई है औऱ पैंगोंग त्सो झील के जिस इलाके से पीछे जाने की बात की जा रही है वह इलाका  वास्तव में चीन का ही है।

 लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जैसे कि पहले कहा गया था  सीमा पर शांति व  स्थिरता का बना रहना ही भारत और चीन के बीच रिश्तों का दिवपक्षीय आधार है।  इसलिये हम चीन से यह उम्मीद करते हैं कि वह अपनी सेना को  पूरी तरह पीछे हटाएगी और सीमा के पीछे वाले इलाकों से  सैन्य  तैनाती को खत्म कर देगी।  प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी सहमति दोनों देशों के सीमा मसले पर  प्रधानमंत्री के विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में बनी थी।  इसे  ही दोनों पक्षों  को लागू करना है।

 

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