DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: HAL के सहयोग से बनेगी देश की पहली एरोस्पेस यूनिवर्सिटी को मंजूरी

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स के सहयोग से देश में पहला अंतरिक्ष वैमानिकी विश्वविद्यालय (एरोस्पेश यूनिवर्सिटी) की स्थापना होगी।





तत्कालीन योजना आयोग के सदस्य  बी के चर्तुवेदी की अध्यक्षता में गठित उच्च अधिकार वाली समिति की सिफारिश को सरकार ने मंजूर कर लिया है। लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री श्रीपाद नायक ने यह जानकारी दी। सरकार ने यह समिति हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लि. (एचएएल) के पुर्नगठन और मजबूत करने के इरादे से  गठित की थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में अलग से एक अंतरिक्ष वैमानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये सिफारिश की। बाद में हैल द्वारा स्थापित सोसाइटी फार एचएएल एरोनाटिक्स  रिसर्च एंड टेकनालाजीज इंस्टीट्यूट   ने एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की।  इसे एचएएल के बोर्ड  ने मंजूर किया था। बाद में रक्षा मंत्रालय ने डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की गहन समीक्षा की। बाद में यह सुझाव दिया गया कि इस तरह के संस्थान की स्थापना सम्बद्ध  नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप होनी चाहिये। यह सुझाव दिया गया कि हैल इस विश्वविद्यालय की स्थापना में  जरूरी अकादमिक औऱ तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग करे।

डीपीआर के मुताबिक यह विश्वविद्यालय दो सौ एकड़ जमीन पर करीब 592 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जा सकता है।  यह विश्वविद्यालय कब तक स्थापित हो सकेगा इस पर निर्भर करता है कि  सम्बद्ध मंत्रालयों और एजेंसियों से कितनी जल्दी सभी मंजूरी हासिल कर लेता है और इसके लिये कौन राज्य सरकार जमीन मुहैया कराती है।

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