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स्पेशल रिपोर्ट: कंटेनरों की वजह से आकाश मिसाइलें संकट में

डीआरडीओ
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत के रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO)  ने अथक प्रयासों के बाद सेनाओं को स्वदेशी  विमान भेदी मिसाइल प्रणाली आकाश बना कर सौंपने में अहम कामयाबी पिछले दशक में पाई थी लेकिन इन मिसाइलों का सफल इस्तेमाल इस बात पर  निर्भर करता है कि इन्हें कैसे कंटेनर में रख कर युदध के मैदान में पहुंचाया जाए। आकाश मिसाइलों को सीमांत इलाकों में तैनात किया जाता है जहां से ये मिसाइलें भारतीय नभसीमा के भीतर प्रवेश कर रहे लडाकू विमानों पर नजर रख कर  उन्हें  25 किलोमीटर दूरी तक निशाना बनाने में कामयाब हो कर आसमान में ही ध्व्स्त करने की क्षमता रखती हैं।





 इन  मिसाइलों पर भारत का हवाई रक्षा तंत्र  निर्भर है लेकिन इन मिसाइलों के केंटनर की सप्लाई कहां से हो इसे लेकर सेनाएं उलझी हुई हैं। आकाश मिसाइलों की सप्लाई करने वाले भारत डाइनामिक्स पर अपने ही सहयोगी रक्षा उपक्रम भारत इलेक्ट्रानिक्स का  दबाव है कि वह घटिया तकनीक वाले कंटेनरों का इस्तेमाल करे।

आकाश मिसाइल जिन केंटेनरों में रखी जाती  है उन्हें प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनर ( पी एम सी ) कहते हैं। इनका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम भारत डाइनामिकस लि. करने में सक्षम है लेकिन इनकी सप्लाई सार्वजनिक क्षेत्र  के दूसरे उपक्रम भारत इलेक्ट्रानिक्स ( बी ई एल ) कर रही है जिसमें तकनीकी खामी और अधिक वजनी होने की वजह से सैनिक इसमें रखी आकाश मिसाइलों का सक्षम इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। या हो सकता है कि वक्त आने पर वे इन  केंटेनर में रखी आकाश मिसाइलों का उपयोग कर ही नहीं पाएं।

 गौरतलब है कि आकाश मिसाइल सिस्टम को थलसेना और वायुसेना दोनों ने अपने हवाई रक्षा तंत्र में  शामिल किया है। आकाश मिसाइल का उत्पादन भारत डाइनामिक्स करती है और इसकी विस्तारित जीवन अवधि तक इसके समुचित रखरखाव के लिये जिम्मेदार है। जब कि भारत इलेक्ट्रानिक्स आकाश मिसाइल के लिये  रेडार और अन्य इलेक्ट्रानिक जमीनी उपकरण की सप्लाई करती है।

 थलसेना की हवाई रक्षा इकाई ( ए ए डी ) अपनी आकाश मिसाइलों, इसमें लगे रेडार और इलेक्ट्रानिक्स की सप्लाई  का आर्डर भारत डाइनामिक्स को देती है और बीडीएल इनकी सप्लाई का ठेका भारत इलेक्ट्रानिक्स को दे देती है। भारत डाइनामिक्स लि. हलके वजन वाले प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनर में आकाश मिसाइलों की सप्लाई के अलावा रेडार और इलेक्ट्रानिक्स की सप्लाई थलसेना को करती है।

 दुसरी ओर वायुसेना आकाश मिसाइलों, इसमें लगने वाले रेडार और इलेक्ट्रानिक्स की सप्लाई का आर्डर भारत इलेट्रानिक्स को देती है। वायुसेना का आर्डर पूरा करने के लिये भारत इलेक्ट्रानिक्स प्रेसराइज्ड  मिसाइल एफ आऱ पी कंटेनर एक स्थानीय स्पलाय़र से हासिल करती है। बाद में भारत इलेक्ट्रानिक्स इन खरीदे गए प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनर को भारत डाइनामिक्स को बेचने की योजना बनाती है। भारत डाइनामिकिस ,  भारत इलेक्ट्रानिक्स से खरीदे गए प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनर को आकाश मिसाइलों के साथ वापस भारत इलेक्ट्रानिक्स को ही बेच देती है।

 पीएमसी की तकनीक दो किस्म की है। एक हलके वजन वाली हानीकोम्ब कम्पोजिट की बनी होती है जो भारत  डाइनामिक्स द्वारा पीएमसी बनाने के लिये हासिल नवीनतम तकनीक है जिसे रक्षा शोध संगठन की प्रयोगशाला DRDL ने मंजूरी दी है। थलसेना ने इसे मंजूरी दी और स्वीकार किया। लाइट वेट के पीएमसी 550 किलो के हैं जिन्हें मैदानी हालत में आसानी से हैंडल किया जा सकता है।

 दूसरी ओर भारत इलेक्ट्रानिक्स ने फाइबर ग्लास रीइनफोर्स्ड ( FRP)  तकनीक वाली  प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनर का इस्तेमाल किया है  जो पारम्परिक तकनीक वाली है  और सौ किलो अधिक यानी 650 किलो वजन का है और इसे  मैदानी हालात में हैंडल करना आसान नहीं होता। इसलिये यह तकनीक पुरानी  मानी जाती है और इसे इस्तेमाल नहीं करने की राय विशेषज्ञ देते हैं क्योंकि युद्ध के दौरान इन कंटेनरों से आकाश मिसाइलों को लोड करने में दिक्कतें आती हैं औऱ इस वजह से दुर्घटना भी हो सकती है।  इसे लोड करने में अतिरिक्त वक्त भी लगता है। इसलिये थलसेना ने FRP  के कंटेनरों वाली मिसाइलें स्वीकार नहीं की।

 इसके मद्देनजर चिंता की बात यह है कि  वायुसेना ने 2016 में FRP केंटेनरों वाली प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनरों वाली आकाश मिसाइलों की खरीद की है  जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक ने काम नहीं किया। इसलिये वायुसेना ने दोनों केंटेनरों के तुलनात्मक अध्ययन के लिये एक बोर्ड का गठन किया। बोर्ड ने BEL द्वारा बनाए गए केंटेनरों में कई खामियां बताईं।

 लेकिन भारत इइलेक्ट्रानिक्स ने भारत डाइनामिक्स पर दबाव डाला कि वह बेल में बने घटिया क्वालिटी वाले प्रेसराइज्ड मिसाइल कंटेनरों का इस्तेमाल करे जिसे वह वापस बेल को सप्लाई करे। भारत डाइनामिक्स को डर  है कि यदि वह बेल को खुश करने की कोशिश करता है तो  वायुसेना इसे लेकर सवाल खडा कर सकती है। और तब बेल भारत डाइनामिक्स को संकट में डाल सकती है।

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